कमरछठ पर महिलाओं ने रखा उपवास, सगरी बनाकर की पूजा; संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना
दूसरे क्षेत्रों में इसे हलछठ और चंदनछठ के नाम से भी जाना जाता

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आज बुधवार को कमरछठ यानी हलषष्ठी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। महिलाओं ने संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से दिनभर उपवास रखा। संतानहीन दंपती भी संतान प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत करते हैं। दूसरे क्षेत्रों में इसे हलछठ और चंदनछठ के नाम से भी जाना जाता है।
सगरी बनाकर की पूजा
व्रती महिलाओं ने पूजा के लिए सगरी यानी प्रतीकात्मक तालाब बनाया। इसमें छह प्रकार के खिलौने और पार्थिव शिवलिंग स्थापित किए गए। महिलाओं ने शिव-पार्वती सहित देवी-देवताओं की पूजा कर कथा सुनी। पूजा में भैंस का दूध, दही और घी के साथ लाई, महुआ, तिल और अरहर समेत छह प्रकार के अन्न चढ़ाए गए।
हल से जुते अन्न का नहीं होता सेवन
हलषष्ठी पर हल से जुते खेत में पैदा हुए अन्न का सेवन नहीं किया जाता। पूजा के बाद पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी से तैयार प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला गया। ज्योतिषाचार्य पं. सुनील तिवारी के अनुसार यह पर्व भादो कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
बाजार में भी रही रौनक
कमरछठ को लेकर बाजारों में पूजन सामग्री की मांग बढ़ी। पसहर चावल, भैंस का दूध-दही, घी, बेलपत्र, कांशी, खमार, बांटी और भौरा की बिक्री हुई। पसहर चावल करीब 20 से 30 रुपए गिलास तक बिका। शहर के कई मोहल्लों में महिलाओं ने सामूहिक पूजा कर संतान के सुखी जीवन की कामना की।


