Hartalika Teej : तीजा के निर्जला व्रत से पहले क्यों खाया जाता है करू भात? जानिए इस खास परंपरा का महत्व
छत्तीसगढ़ में तीजा व्रत से पहले निभाई जाती है अनोखी परंपरा, करेला-भात खाने के पीछे जुड़ी है धार्मिक और लोक मान्यता

Hartalika Teej : रायपुर। छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व सिर्फ व्रत और पूजा का अवसर नहीं, बल्कि लोक परंपराओं और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार है। तीजा के निर्जला व्रत से एक दिन पहले महिलाओं द्वारा ‘करू भात’ खाने की परंपरा निभाई जाती है। इस परंपरा में करेला की सब्जी और भात का भोजन किया जाता है।
क्या होता है करू भात?
छत्तीसगढ़ी में कड़वे को ‘करू’ और पके हुए चावल को ‘भात’ कहा जाता है। तीजा व्रत से एक दिन पहले शाम को महिलाएं करेला की सब्जी और भात खाती हैं। इसके साथ खीरा खाने की भी परंपरा है। इसके बाद व्रत शुरू होने तक अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में करू भात के दिन घरों में खास तौर पर करेले की सब्जी बनाई जाती है। इसे तीजा व्रत की तैयारी और पारंपरिक रीति के रूप में देखा जाता है।
क्यों निभाई जाती है यह परंपरा?
मान्यता के अनुसार, करू भात के बाद अगले दिन निर्जला व्रत रखने से शरीर को व्रत के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। करेले को शरीर से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के कारण इस भोजन का अहम हिस्सा माना गया है। हालांकि इसके स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं।
क्या है हरतालिका तीज का महत्व?
हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जुड़ा पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी सहेलियां उन्हें अपने साथ ले जाकर एक गुफा में छिपा ले गई थीं, जिसके बाद उन्होंने वहां शिव की आराधना की। इसी कथा से ‘हरतालिका’ नाम जुड़ा माना जाता है—‘हरत’ यानी हरण और ‘आलिका’ यानी सखी। छत्तीसगढ़ में यह पर्व महिलाओं के लिए पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।


