Mungeli Davanpur Tigress attack: मुंगेली में बाघिन की आमद, खेत में खाद डाल रहे किसान पर हमला, 20 दिन में दूसरा मामला
Mungeli Davanpur Tigress attack: मुंगेली से लगे बिलासपुर के दवनपुर गांव में खेत में खाद डाल रहे किसान पर बाघिन ने हमला कर दिया। किसान के हाथ, पैर और चेहरे पर चोटें आई हैं।

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला से लगे बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के दवनपुर गांव में खेत में काम कर रहे एक किसान पर बाघिन ने हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में 42 वर्षीय संजय मरकाम के बाएं हाथ, बाएं पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं।
घायल किसान को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए गनियारी स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
खेत में खाद डाल रहे थे संजय, तभी हुआ हमला
जानकारी के मुताबिक, दवनपुर निवासी संजय मरकाम अपने खेत में खाद डाल रहे थे। इसी दौरान खेतों के बीच अचानक एक बाघिन पहुंची और उन पर हमला कर दिया।
हमले में संजय के बाएं हाथ, बाएं पैर और चेहरे पर चोटें आईं। घटना के बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए कोटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
गनियारी स्वास्थ्य केंद्र रेफर
कोटा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद संजय को बेहतर इलाज के लिए गनियारी स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया है। घटना अचानकमार टाइगर रिजर्व से सटे सामान्य वन क्षेत्र में होने की जानकारी सामने आई है।
20 दिन में बाघिन के हमले की दूसरी घटना
इस घटना ने आसपास के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 20 दिन पहले, 24 अगस्त को लोरमी के लक्ष्मण डोंगरी के पास जंगल में पुटू तोड़ने गए बांधा निवासी धर्मजीत धृतलहरे पर भी बाघिन ने हमला किया था। इस हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
अब दवनपुर में किसान पर हुए हमले के बाद क्षेत्र में बाघिन की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में डर बढ़ गया है। जंगल से सटे इलाकों में खेत और जंगल के आसपास काम करने वाले लोगों के लिए यह घटना खास तौर पर चिंता का विषय बन गई है।
जंगल से सटे इलाकों में बढ़ी चिंता
दवनपुर की घटना के बाद ग्रामीणों में वन क्षेत्र के आसपास काम करने को लेकर सतर्कता बढ़ने की संभावना है। खेतों और जंगल से लगे इलाकों में अचानक वन्यजीवों की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
फिलहाल घायल किसान का इलाज जारी है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर वन्यजीव की गतिविधियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।


