Chhattisgarh Staff Selection Board: छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े पर लगाम, आवेदन से जॉइनिंग तक होगा 3-लेवल डिजिटल वेरिफिकेशन, पढ़ें पूरी खबर
Chhattisgarh Staff Selection Board: CGSSB की परीक्षाओं में अब आवेदन से जॉइनिंग तक 3-लेवल का डिजिटल आधार वेरिफिकेशन होगा। जानें पूरी प्रक्रिया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और काम की खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। अब परीक्षाओं में आवेदन करने से लेकर परीक्षा हॉल में बैठने और अंततः नौकरी जॉइन करने तक, हर चरण में डिजिटल वेरिफिकेशन किया जाएगा।
अक्सर परीक्षाओं में फर्जीवाड़े या किसी दूसरे की जगह बैठने (सॉल्वर गैंग) जैसी शिकायतें सामने आती हैं। इन सभी पर नकेल कसने के लिए यह नई व्यवस्था लाई जा रही है, जिससे ईमानदार और मेहनती उम्मीदवारों को पूरा न्याय मिल सके।
कैसे काम करेगा 3-लेवल का डिजिटल वेरिफिकेशन?
नई व्यवस्था के तहत पूरी चयन प्रक्रिया को तीन सुरक्षित स्तरों में बांटा गया है ताकि पहचान की पुख्ता जांच हो सके।
1. आवेदन के समय डिजिटल पुष्टि
जब अभ्यर्थी ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे, तभी से उनकी डिजिटल पहचान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इससे शुरुआत से ही यह रिकॉर्ड स्पष्ट रहेगा कि फॉर्म किसने भरा है।
2. परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक जांच
परीक्षा हॉल में प्रवेश करते वक्त सिर्फ पारंपरिक एडमिट कार्ड और फोटो आईडी ही नहीं देखी जाएगी। केंद्र पर आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा:-
फिंगरप्रिंट स्कैन:- उम्मीदवार के अंगूठे के निशान का मिलान किया जाएगा।
आईरिस स्कैन (आंखों की पुतली की जांच):- डिजिटल तकनीक से आंखों को स्कैन कर सटीक पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
3. नियुक्ति और जॉइनिंग के वक्त मिलान
सिर्फ परीक्षा पास कर लेना ही काफी नहीं होगा। जब फाइनल सिलेक्शन के बाद उम्मीदवार नौकरी जॉइन करने पहुंचेगा, तब एक बार फिर उसकी पहचान का मिलान किया जाएगा ताकि यह पक्का हो सके कि परीक्षा देने वाला और नौकरी जॉइन करने वाला व्यक्ति एक ही है।
क्या आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य है? जानिए राहत भरी बातें
अभ्यर्थियों के मन में यह सवाल आ सकता है कि यदि किसी तकनीकी कारण से वेरिफिकेशन न हो पाए तो क्या होगा? मंडल ने इन व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं:-
स्वैच्छिक और सहमति आधारित:- शुरुआती चरण में आधार प्रमाणीकरण को पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है। अभ्यर्थी की लिखित सहमति के बाद ही इसका उपयोग किया जाएगा।
तकनीकी दिक्कत पर नहीं होगी असुविधा:- यदि सर्वर डाउन है या फिंगरप्रिंट मैच होने में कोई तकनीकी परेशानी आती है, तो किसी भी छात्र को परीक्षा से बाहर नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में ई-केवाईसी या अन्य वैध सरकारी दस्तावेजों के जरिए पहचान वेरिफाई की जाएगी।
परीक्षा ड्यूटी पर तैनात अमले की भी होगी जांच
यह नियम सिर्फ परीक्षा देने वालों पर ही लागू नहीं होगा, बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात लोगों पर भी नजर रखी जाएगी।
निगरानी करने वाले अधिकारियों, केंद्र पर्यवेक्षकों
(Observers) और परीक्षा संचालन से जुड़े अन्य कर्मचारियों का भी आधार प्रमाणीकरण किया जाएगा। इससे अंदरूनी स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या मिलीभगत की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में कुछ महीने पहले ही कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) का गठन किया गया है। यह नया मंडल विभिन्न विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के साथ-साथ प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। इससे पहले इन सभी जिम्मेदारियों को व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं द्वारा संभाला जाता था।


