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CGPSC paper leak case : 3700 पेज की चार्जशीट..99 पेज की समरी, टामन सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के खिलाफ कोर्ट चालान में क्या कहा ईडी ने, यहां जानिए डिटेल्स

CGPSC केस में ED ने टामन सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के खिलाफ चार्जशीट पेश की। जानिए 3700 पेज के दस्तावेजों और जांच में क्या सामने आया।

CGPSC paper leak case : 3700 पेज की चार्जशीट..99 पेज की समरी, टामन सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के खिलाफ कोर्ट चालान में क्या कहा ईडी ने, यहां जानिए डिटेल्स
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CGPSC paper leak case : रायपुर। छत्तीसगढ़ पीएससी पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट पेश की है। एजेंसी ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया के खिलाफ चालान पेश किया है। चार्जशीट के साथ बड़ी संख्या में दस्तावेज भी लगाए गए हैं।

ED की कार्रवाई इस मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। इससे पहले एजेंसी टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार कर चुकी है। चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी 11 सितंबर 2026 को हुई थी। ED के मुताबिक, जांच का आधार CGPSC परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में अनियमितता और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन हैं।

चार्जशीट में 99 पेज की समरी

ED ने कोर्ट में पेश किए गए चालान के साथ 99 पेज की समरी और करीब 3700 पेज के सहायक दस्तावेज लगाए हैं। इन दस्तावेजों के जरिए एजेंसी ने मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जांच सामग्री को रिकॉर्ड पर रखा है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एजेंसी मामले में पैसों के लेन-देन की कड़ी और कथित अपराध से हुई आय का पता लगाने पर भी जांच आगे बढ़ा रही है।

टामन सोनवानी पर क्या आरोप हैं?

ED के अनुसार, टामन सिंह सोनवानी के CGPSC अध्यक्ष रहने के दौरान कुछ लोगों के साथ मिलकर परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई। एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन से जुड़े प्रयास किए गए।

जांच में डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर चयन से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

भर्ती नियम में बदलाव..‘nephew’ शब्द हटाया

ED की जांच में भर्ती नियमों में कथित बदलाव का मुद्दा भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2021 में नियमों में बदलाव करते हुए परिवार की परिभाषा से ‘nephew’ शब्द हटाया गया था। ED का आरोप है कि इस बदलाव का संबंध कुछ रिश्तेदारों के चयन को लेकर चल रही कथित साजिश से था। इस पहलू को भी एजेंसी ने अपनी जांच में शामिल किया है।

पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल

मामले में ED केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित अपराध से हुई आय और उसके पैसों के रास्ते की भी जांच कर रही है।

चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद ED ने बताया था कि उनके बैंक खाते में संबंधित अवधि के दौरान 170 लेन-देन के जरिए कुल 66.74 लाख रुपये की नकद जमा का पता चला। एजेंसी ने उनके और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वित्तीय लेन-देन की भी जांच की है।

उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका पर भी जांच

ED ने 1 सितंबर 2026 को रायपुर, दुर्ग और जशपुर में पांच स्थानों पर तलाशी के बाद उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने इस कार्रवाई में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात जब्त करने की जानकारी दी थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया गया। इस मामले में वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को भी जांचा जा रहा है।

चेतन बोरघरिया भी जेल में

चेतन बोरघरिया पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी यानी ओएसडी रह चुके हैं और बाद में बलरामपुर-रामानुजगंज में अपर कलेक्टर के पद पर तैनात थे। ED ने उन्हें 11 सितंबर को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस तरह मामले में टामन सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया तीनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में चार्जशीट और उसके साथ पेश किए गए दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

CBI भी कर चुकी है जांच

CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच पहले राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर से शुरू हुई थी।

बाद में CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में ली और टामन सिंह सोनवानी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। ED की जांच इसी मूल मामले से जुड़े कथित धनशोधन पहलू पर केंद्रित है।

क्या है पूरा CGPSC मामला?

यह मामला CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए परीक्षा प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया।

ED अब इसी कथित अनियमितता से जुड़े पैसों के स्रोत, लेन-देन और कथित अपराध से हुई आय की जांच कर रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की अगली दिशा अदालत में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों की जांच से तय होगी।


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