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Bhuteshwar Mahadev : हर साल बढ़ता है भूतेश्वर महादेव का शिवलिंग, सावन में दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

गरियाबंद के मरौदा जंगल में स्थित है प्राकृतिक शिवलिंग, सावन में दूर-दूर से पहुंच रहे कांवड़िए और श्रद्धालु; हर साल बढ़ती ऊंचाई बनी आस्था और जिज्ञासा का केंद्र।

Bhuteshwar Mahadev : हर साल बढ़ता है भूतेश्वर महादेव का शिवलिंग, सावन में दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
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Bhuteshwar Mahadev : गरियाबंद। सावन का महीना शुरू होते ही छत्तीसगढ़ के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। गरियाबंद जिले के मरौदा गांव के जंगल में स्थित भूतेश्वर महादेव का मंदिर भी इन दिनों आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर प्राकृतिक रूप से बने इस शिवलिंग के दर्शन के लिए सावन में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

भूतेश्वर महादेव को स्थानीय लोग भकुर्रा महादेव के नाम से भी जानते हैं। इस स्थान की खास पहचान शिवलिंग के आकार को लेकर है। स्थानीय मान्यता है कि इसकी ऊंचाई हर साल बढ़ती है। इसी वजह से इस प्राकृतिक शिवलिंग को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है।

अर्धनारीश्वर स्वरूप में होती है पूजा

भूतेश्वर महादेव के शिवलिंग में एक हल्की दरार दिखाई देती है। स्थानीय लोग इसे भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप से जोड़कर देखते हैं। शिवलिंग के पीछे भगवान शिव की प्रतिमा भी स्थापित है, जिसमें माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी के साथ शिव विराजमान हैं। मंदिर परिसर में अब कई छोटे मंदिर भी बनाए गए हैं, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए बेहतर सुविधा मिल रही है।

हर साल महाशिवरात्रि पर नापी जाती है ऊंचाई

भूतेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी केशव सोम के मुताबिक सावन के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग की ऊंचाई नापने की परंपरा है। भूतेश्वर महादेव संचालन समिति से करीब 25 वर्षों से जुड़े मनोहर लाल देवांगन के अनुसार स्थानीय लोगों का मानना है कि शिवलिंग की ऊंचाई हर साल करीब 6 से 7 इंच बढ़ती है। मंदिर की व्यवस्था और सेवा कार्यों में आसपास के 17 गांवों की समिति भी सहयोग करती है।

पुराने रिकॉर्ड में भी मिलता है ऊंचाई का जिक्र

भूतेश्वर महादेव की ऊंचाई को लेकर पुराने दस्तावेजों में भी उल्लेख मिलता है। जानकारी के अनुसार 1952 में प्रकाशित कल्याण तीर्थांक के पृष्ठ संख्या 408 पर इसकी ऊंचाई 35 फीट और व्यास 150 फीट बताया गया था। इसके बाद 1978 में इसकी ऊंचाई 40 फीट, 1987 में 55 फीट और 1994 में थियोडोलाइट मशीन से किए गए मापन में ऊंचाई करीब 62 फीट दर्ज होने की बात सामने आती है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान में इसकी ऊंचाई करीब 80 फीट बताई जाती है। शिवलिंग के आकार में बदलाव को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं और इसका बढ़ना आज भी चर्चा और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।

कभी घने जंगल के बीच था यह स्थान

स्थानीय इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक आजादी से पहले मरौदा क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था। उस समय गांव के चरवाहे अपने मवेशियों को चराने के लिए इस इलाके में आते थे। बताया जाता है कि उस दौर में यहां करीब 3 फीट ऊंचा प्राकृतिक पत्थर दिखाई देता था, जिसे बाद में शिवलिंग के रूप में पूजा जाने लगा। आसपास चरने वाले मवेशियों और सांडों के यहां मंडराने की बातें भी स्थानीय लोगों की स्मृतियों का हिस्सा हैं।

ऐसे पड़ा ‘भकुर्रा महादेव’ नाम

स्थानीय मान्यता के अनुसार जंगल में अक्सर सांड के ‘भकुर्राने’ यानी जोर से आवाज करने की ध्वनि सुनाई देती थी। बाद में जब प्राकृतिक शिवलिंग की ओर लोगों का ध्यान गया और इसकी पूजा शुरू हुई, तो इसे भकुर्रा महादेव कहा जाने लगा। यह कहानी आज भी स्थानीय लोगों के बीच सुनाई जाती है और मंदिर की पहचान का हिस्सा बन चुकी है।

सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़

सावन के दौरान भूतेश्वर महादेव के मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। आसपास के गांवों के अलावा दूसरे जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु कांवड़ लेकर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।


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