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CG News: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होंगे विनोद कुमार शुक्ल, CM साय ने दी बधाई...

CG News: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होंगे विनोद कुमार शुक्ल, CM साय ने दी बधाई...
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CG News: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होंगे विनोद कुमार शुक्ल, CM साय ने दी बधाई…

रायपुर। हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को साल 2025 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। ज्ञानपीठ समिति ने 22 मार्च 2025 को नई दिल्ली में इस बात की घोषणा की। यह छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि विनोद कुमार शुक्ल इस सम्मान को पाने वाले राज्य के पहले साहित्यकार बन गए हैं। इस खबर के साथ ही छत्तीसगढ़ का नाम एक बार फिर साहित्यिक पटल पर गर्व के साथ उभरा है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विनोद कुमार शुक्ल को बधाई देते हुए कहा,
"यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उनकी लेखनी ने हमें गौरवान्वित किया है। उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना करता हूँ।"
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और इसे राज्य के लिए गौरवशाली पल बताया।

कौन हैं विनोद कुमार शुक्ल?

1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल पिछले पांच दशकों से हिंदी साहित्य में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे रायपुर में निवास करते हैं। उनकी पहली कविता संग्रह ‘लगभग जयहिंद’ वर्ष 1971 में प्रकाशित हुई थी, जिसने उनकी साहित्यिक यात्रा की नींव रखी। उनकी रचनाएँ सादगी, गहराई और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को उकेरने के लिए जानी जाती हैं।

विनोद कुमार शुक्ल की प्रमुख रचनाएँ

  • कविता संग्रह:

    • लगभग जयहिंद (1971)

    • वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह (1981)

    • सब कुछ होना बचा रहेगा (1992)

    • कविता से लंबी कविता (2001)

    • कभी के बाद अभी (2012)

  • उपन्यास:

    • नौकर की कमीज़ (1979)

    • खिलेगा तो देखेंगे (1996)

    • दीवार में एक खिड़की रहती थी (1997)

    • हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ (2011)

अब तक मिले सम्मान

विनोद कुमार शुक्ल को इसके पहले कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार

  • रज़ा पुरस्कार

  • शिखर सम्मान

  • गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप

ज्ञानपीठ पुरस्कार उनकी साहित्यिक उपलब्धियों का सबसे बड़ा प्रमाण है। उनके इस सम्मान से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत में खुशी की लहर है।


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