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CG News : देवपुर के जंगल में दिखी दुर्लभ जायंट मालाबार स्क्विरल, जैव विविधता ने फिर बढ़ाई छत्तीसगढ़ की शान

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CG News: Rare Giant Malabar Squirrel spotted in Devpur forest, biodiversity once again enhances Chhattisgarhs pride
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CG News: Rare Giant Malabar Squirrel spotted in Devpur forest, biodiversity once again enhances Chhattisgarh’s pride

CG News : बलौदाबाजार। जिले के देवपुर जंगल में आयोजित समर कैंप के दौरान प्रकृति प्रेमियों को ऐसा नजारा देखने मिला, जिसने सभी को रोमांचित कर दिया। बर्डिंग ट्रेल पर निकले प्रतिभागियों को भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में शामिल दुर्लभ जायंट मालाबार स्क्विरल दिखाई दी। इस अनोखे वन्यजीव की मौजूदगी ने बारनवापारा क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

CG News : लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों से सजी यह विशालकाय गिलहरी सामान्य गिलहरियों से बिल्कुल अलग नजर आती है। इसकी लंबी फूली हुई पूंछ और पेड़ों पर फुर्ती से छलांग लगाने की क्षमता ने कैंप में शामिल बच्चों और युवाओं को रोमांचित कर दिया। बताया जाता है कि यह प्रजाति पूरी तरह वृक्षों पर रहने वाली होती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक करीब 20 फीट तक छलांग लगा सकती है।

CG News : प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी हेमंत वर्मा ने बताया कि देवपुर जंगल में जायंट मालाबार स्क्विरल का दिखाई देना बेहद सकारात्मक संकेत है। उनके मुताबिक ऐसी संवेदनशील प्रजातियां केवल उन्हीं जंगलों में पाई जाती हैं, जहां का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित और सुरक्षित हो।

CG News : बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य और आसपास के जंगल पहले से ही दुर्लभ पक्षियों, तितलियों और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। अब इस दुर्लभ गिलहरी की मौजूदगी ने इस क्षेत्र की जैविक समृद्धि को और मजबूती से सामने रखा है।

CG News : डीएफओ धम्मशील गणवीर ने भी इसे वन संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों जीवों का आश्रय होते हैं। ऐसी प्रजातियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि प्राकृतिक संतुलन अभी भी जीवित है।

CG News : विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के वन्यजीव अवलोकन लगातार सामने आते रहे, तो देवपुर और बारनवापारा क्षेत्र भविष्य में इको-टूरिज्म और बर्डिंग गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। वहीं बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।


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