CG News : कोरबा। जहां पूरे देश में होली रंग-गुलाल और उत्साह के साथ मनाई जाती है, वहीं जिले के धमनागुड़ी और खरहरी गांवों में यह पर्व अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां न तो होलिका दहन किया जाता है और न ही रंग-गुलाल खेला जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा पूर्वजों की आस्था और मान्यता से जुड़ी हुई है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा से निभाया जा रहा है।
CG News : अनहोनी के डर से बनी परंपरा-
गांव के बुजुर्गों का मानना है कि यदि यहां होली खेली गई तो अनहोनी हो सकती है। इसी विश्वास के चलते दशकों से रंगों और अग्नि प्रज्वलन से दूरी बनाई गई है। धमनागुड़ी निवासी गनपत सिंह कंवर बताते हैं कि उनके बचपन से ही गांव में होली नहीं खेली जाती और करीब 100 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है।
CG News : कोशिश के बाद हुई आगजनी-
खरहरी निवासी तामेश्वर सिंह पैकरा के मुताबिक, करीब 9 साल पहले एक परिवार ने गांव में होली खेलने की कोशिश की थी। रंग खेलने के कुछ समय बाद उनके घर में अचानक आग लग गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों का विश्वास और मजबूत हो गया और तब से किसी ने होली खेलने का प्रयास नहीं किया।
CG News : बाहर खेलकर आने वालों से भी सवाल-
ग्रामीण बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति बाहर जाकर होली खेलकर गांव लौटता है, तो उससे इस बारे में पूछताछ की जाती है। इसे गांव की सुरक्षा और परंपरा से जोड़ा जाता है। धमनागुड़ी और खरहरी की यह अनूठी परंपरा दर्शाती है कि त्योहार केवल रंगों और उत्सव का नाम नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सामुदायिक मान्यताओं से भी जुड़े होते हैं।
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