CG Freedom of Religion Bill-2026: धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 विधानसभा में पेश, पहले देना होगा घोषणा-पत्र, अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कैद का प्रावधान
CG Freedom of Religion Bill-2026: रायपुर। राज्य सरकार ने अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधानों वाला धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 विधानसभा में पेश किया है। यह विधेयक पूर्व में लागू धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-1968 का स्थान लेगा और इसमें सजा एवं प्रक्रिया दोनों को अधिक सख्त बनाया गया है। इसमें अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
CG Freedom of Religion Bill-2026: विधेयक के अनुसार, धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा। घोषणा पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा और स्थानीय पुलिस, तहसीलदार व ग्राम पंचायत को इसकी सूचना दी जाएगी। प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर धर्म परिवर्तन को अवैध और शून्य माना जाएगा।
CG Freedom of Religion Bill-2026: नए कानून में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रलोभन, मिथ्या प्रस्तुतीकरण, महिमामंडन या डिजिटल माध्यमों के जरिए धर्मांतरण के लिए प्रेरित नहीं कर सकेगा। अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य किया गया है।
CG Freedom of Religion Bill-2026: सक्षम प्राधिकारी को जांच के अधिकार दिए गए हैं, जिनमें गवाहों को बुलाना, शपथ पत्र लेना और पूरे मामले की जांच करना शामिल है। इस प्रक्रिया को न्यायिक कार्रवाई माना जाएगा और शिकायत मिलने पर 30 दिनों के भीतर अंतिम आदेश पारित किया जाएगा।
CG Freedom of Religion Bill-2026: विवाह से जुड़े मामलों में भी सख्त नियम बनाए गए हैं। अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले फादर, पादरी, मौलवी या अन्य अधिकृत व्यक्ति तथा विवाह करने वाले पक्षों को प्रस्तावित तिथि से 60 दिन पूर्व घोषणा पत्र देना होगा। केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा और विवाह स्वत: धर्मांतरण का आधार नहीं बनेगा।
CG Freedom of Religion Bill-2026: दंड प्रावधानों के तहत अवैध धर्मांतरण पर न्यूनतम 7 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति-जनजाति के मामलों में सजा 10 से 20 वर्ष तक और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माना तय किया गया है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।



