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CG Breaking: सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला, पटवारी-आरआई पदोन्नति परीक्षा रद्द, नए सिरे से होगी परीक्षा

CG Breaking: सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला, पटवारी-आरआई पदोन्नति परीक्षा रद्द, नए सिरे से होगी परीक्षा
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CG Breaking: सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला, पटवारी-आरआई पदोन्नति परीक्षा रद्द, नए सिरे से होगी परीक्षा

CG Breaking: नई दिल्ली/रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा को रद्द करने संबंधी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

CG Breaking: न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अपील दाखिल करने में हुई देरी को माफ तो कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा परीक्षा निरस्त करने का आदेश यथावत बना रहेगा।

CG Breaking: क्या है मामला

बता दें कि, वर्ष 2023 में आयोजित विभागीय परीक्षा के आधार पर पटवारियों को राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति दी जानी थी। परीक्षा के बाद जारी चयन सूची को चुनौती देते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ और बाद में खंडपीठ ने भी परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय दिया था। इस मामले में धनंजय सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के 2 जनवरी 2026 और 10 अप्रैल 2026 के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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CG Breaking: हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे, ने अपने फैसले में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह जताया था। अदालत ने कहा था कि ओएमआर शीट पर अभ्यर्थियों से मोबाइल नंबर लिखवाने की व्यवस्था परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इससे अभ्यर्थियों की पहचान उजागर होने की आशंका रहती है।

CG Breaking: अदालत ने यह भी गौर किया था कि परीक्षा में प्रश्नों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 कर दी गई, जबकि परीक्षा अवधि 90 मिनट ही रखी गई। ऐसे में सभी प्रश्नों का उत्तर देना व्यवहारिक रूप से कठिन प्रतीत होता है, जबकि कुछ अभ्यर्थियों के असाधारण रूप से अधिक अंक प्राप्त करने से भी संदेह की स्थिति बनी।

CG Breaking: इसके अलावा विभिन्न जिलों में पदस्थ 22 करीबी रिश्तेदारों को क्रमवार रोल नंबर आवंटित किए जाने को भी अदालत ने संदेहास्पद माना था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा था कि परीक्षा प्रणाली की पवित्रता और निष्पक्षता सर्वोपरि है तथा यदि पूरी प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न हो जाए तो परीक्षा निरस्त करना उचित माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब राज्य सरकार के लिए नई विभागीय परीक्षा आयोजित करनी होगी।


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