चेतना विकास मूल्य शिक्षा से ही संभव है बच्चों का सर्वांगीण विकास : कृष्ण कुमार साहू
धमतरी। ग्राम बोडरा, जिला धमतरी में परिवारों द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर में चेतना विकास मूल्य शिक्षा पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मगरलोड संभाग के 12 ग्रामों से आए सरस्वती शिशु मंदिरों के लगभग 90 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एससीईआरटी शंकरनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) के चेतना विकास मूल्य शिक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी कृष्ण कुमार साहू ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल अकादमिक शिक्षा से संभव नहीं है, बल्कि चेतना विकास मूल्य शिक्षा इसके लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विस्तार से बताया कि चेतना विकास मूल्य शिक्षा क्या है, यह क्यों जरूरी है और इससे विद्यार्थी किस प्रकार लाभान्वित होते हैं।

कार्यशाला में प्रबोधक दंपत्ति के रूप में प्राचार्य गौरीकांता दीदी ने भी शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान किया। सत्रों के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत चेतना विकास मूल्य शिक्षा की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही बताया गया कि इस शिक्षा पद्धति के प्रणेता श्री अग्रहार नागराज शर्मा के विचारों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किस प्रकार राज्य में लागू और संचालित किया जा रहा है।

इस अवसर पर मानव मैत्री समिति के सदस्य, जितेंद्र साहू भाईजी (प्रधान पाठक) सहित अनेक शिक्षाविद और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह आचार्य आवर्ती वर्ग (मासिक प्रशिक्षण कार्यशाला) विशेष रूप से विद्या भारती से संबद्ध सरस्वती शिशु मंदिरों के शिक्षकों के लिए आयोजित किया जाता है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ छात्रों में संस्कार, भारतीय संस्कृति और सर्वांगीण विकास को सुदृढ़ करना है, ताकि बौद्धिक, नैतिक और शारीरिक ज्ञान को प्रभावी ढंग से शिक्षण प्रक्रिया में लागू किया जा सके।
