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टेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव: भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ज्यादा मैचों की तैयारी...

टेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव: भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ज्यादा मैचों की तैयारी
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टेस्ट क्रिकेट में बड़ा बदलाव: भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ज्यादा मैचों की तैयारी

Cricket News : हाल ही में खत्म हुई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की जोरदार सफलता के बाद टेस्ट क्रिकेट में बड़े बदलाव की संभावना है। भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया अब आपस में अधिक टेस्ट मैच खेलने पर विचार कर रहे हैं। आईसीसी भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार है, और जल्द ही जय शाह इस मुद्दे पर बैठक कर सकते हैं।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी: ब्लॉकबस्टर सफलता

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (2024-25) ऑस्ट्रेलिया में अब तक की सबसे ज्यादा देखी गई टेस्ट सीरीज साबित हुई। पर्थ, ब्रिस्बेन, मेलबर्न और सिडनी जैसे मैदानों पर दर्शकों का जबरदस्त हुजूम देखने को मिला। हालांकि, टीम इंडिया यह सीरीज 1-3 से हार गई, लेकिन सीरीज की लोकप्रियता ने सभी का ध्यान खींचा।

टेस्ट क्रिकेट के लिए नया मॉडल

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया अब आपस में अधिक टेस्ट मैच खेलने की योजना बना रहे हैं। उनकी चाहत है कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जैसी ब्लॉकबस्टर सीरीज भारत-इंग्लैंड और इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के बीच भी देखी जाए। आईसीसी के एजेंडे में टेस्ट क्रिकेट के लिए दो-स्तरीय संरचना (2-टीयर स्ट्रक्चर) शामिल है, जिसे 2027 के बाद लागू किया जाएगा।

जय शाह की बैठक की योजना

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन माइक बैर्ड और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के चीफ रिचर्ड थॉम्पसन जनवरी के अंत में आईसीसी चेयरमैन जय शाह से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर चर्चा होगी।

रवि शास्त्री का समर्थन

भारत के पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री ने भी आईसीसी के इस एजेंडे का समर्थन किया है। उन्होंने सिडनी टेस्ट के दौरान कहा, "अगर आप चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट जीवंत और समृद्ध रहे, तो टॉप टीमें एक-दूसरे के खिलाफ ज्यादा मैच खेलें। यही वह रास्ता है, जो टेस्ट क्रिकेट को बेहतर बनाएगा।"

2027 के बाद बड़े बदलाव की उम्मीद

आईसीसी के फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) 2027 के बाद इस नए मॉडल को लागू करने की संभावना है। इस बदलाव से टेस्ट क्रिकेट को नई दिशा मिल सकती है और दर्शकों की रुचि बढ़ाई जा सकती है।

टेस्ट क्रिकेट के इस बदलाव से यह स्पष्ट है कि आईसीसी और क्रिकेट बोर्ड्स खेल के पारंपरिक फॉर्मेट को जीवंत बनाए रखने के लिए गंभीर हैं। अब देखना होगा कि आने वाले वर्षों में यह योजना कैसे अमल में लाई जाती है।


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