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Big Breaking: राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ का आदेश

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President has no authority to impose tariffs
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President has no authority to impose tariffs

Big Breaking: वॉशिंगटन डीसी। President has no authority to impose tariffs: अमेरिकी के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ट्रम्प के दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध बताया है। साथ ही कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। ये टैरिफ एक आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत लगाए गए थे।

Big Breaking: कोर्ट का यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगा दिए थे। टैरिफ का मतलब होता है कि किसी देश से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए, ताकि वह महंगा हो जाए और घरेलू कंपनियों को फायदा मिले।

Big Breaking: ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल किया

इस पूरे विवाद के केंद्र में एक कानून है, जिसका नाम इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है। यह कानून 1977 में बनाया गया था। इसका मकसद यह था कि अगर देश पर कोई गंभीर खतरा जैसे युद्ध जैसी स्थिति, विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा या असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट आए तो राष्ट्रपति को कुछ खास शक्तियां दी जा सकें। इन शक्तियों के तहत राष्ट्रपति विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकता है, उन्हें नियंत्रित कर सकता है या कुछ आर्थिक फैसले तुरंत लागू कर सकता है। ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का ही सहारा लिया था।

Big Breaking: व्यापार घाटे को इमरजेंसी बताकर लगाया था टैरिफ

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।

Big Breaking: ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा

ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया है।

Big Breaking: ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि टैरिफ हटाने पड़े तो अरबो डॉलर की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा। ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि टैरिफ हटाने पड़े तो अरबो डॉलर की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था

Big Breaking: निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना है कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश किए गए दलीलों पर संदेह जताया। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं।


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