जिले में पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों और ग्रामीणों को प्रमाणीकरण के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटवारी पोर्टल के माध्यम से होने वाले प्रमाणीकरण कार्य हड़ताल के चलते बंद हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों और किसानों की समस्याएं
- लंबी दूरी की समस्या:
तहसील मुख्यालय से 20-30 किलोमीटर दूर स्थित गांवों के लोगों को प्रमाणीकरण के लिए बार-बार मुख्यालय आना पड़ रहा है। - समय और संसाधनों की बर्बादी:
पटवारियों की हड़ताल के कारण प्रमाणीकरण प्रक्रिया लंबी और मुश्किल हो गई है, जिससे ग्रामीणों का समय और संसाधन बर्बाद हो रहा है। - पटवारी पोर्टल बंद:
हड़ताल के चलते पटवारी पोर्टल का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जो पहले प्रमाणीकरण प्रक्रिया को आसान बनाता था।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों और किसानों ने एशियन न्यूज से अपनी समस्याएं साझा करते हुए बताया कि पटवारियों की अनुपस्थिति से उनके भूमि खरीद-फरोख्त और फसल संबंधी प्रमाणीकरण कार्य ठप हो गए हैं।
एक किसान ने कहा, “पटवारी प्रमाणीकरण करने से हमारा काम जल्दी हो जाता था, लेकिन अब तहसील जाने में समय और पैसे दोनों का नुकसान हो रहा है।”
प्रमुख चिंताएं
- हड़ताल कब समाप्त होगी?
- किसानों और ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी?
- प्रशासन इस समस्या को कैसे और कब तक हल करेगा?
प्रशासन की चुनौती
पटवारियों की हड़ताल से जमीनी रिकॉर्ड कार्य और प्रमाणन प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो चुकी है। प्रशासन को जल्द से जल्द पटवारियों की मांगों पर विचार कर हड़ताल खत्म करवाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
यह स्थिति न केवल ग्रामीणों और किसानों के लिए समस्याएं पैदा कर रही है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों पर भी असर डाल रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि यह हड़ताल कब समाप्त होगी और किसानों को राहत कब मिलेगी।

