नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण लंबे समय से गंभीर स्तर पर बना हुआ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दिल्ली की हवा खतरनाक स्तर पर – सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइंया की पीठ ने कहा कि प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हैं जो सड़कों पर काम करते हैं। हर व्यक्ति के पास घर या ऑफिस में एयर प्यूरीफायर लगाने की सुविधा नहीं होती। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है, और यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखे प्रदूषण को बेहद कम करते हैं, तब तक उन पर लगी रोक जारी रहेगी। मौजूदा गंभीर स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को अनिवार्य बताया।
प्रतिबंध जारी रहेगा, कोई रियायत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक है। अदालत ने जोर देकर कहा कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने होंगे। इस फैसले से प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।