नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की अच्छेर शाखा में किसानों की जमा पूंजी से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। किसानों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि उनके बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम उनकी सहमति के बिना ट्रांसफर की गई। मामले के सामने आने के बाद बैंक ने शाखा प्रबंधक समेत सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है।

पुलिस के मुताबिक, खाताधारकों को कथित गड़बड़ी का पता तब चला, जब वे अपनी जमा रकम निकालने के लिए बैंक पहुंचे। इसके बाद किसानों ने बैंक शाखा के बाहर प्रदर्शन कर अपनी रकम वापस दिलाने और मामले में कार्रवाई की मांग की।

PNB मुख्यालय ने रकम रोकने की कही बात

गौतम बुद्ध नगर जिले के प्रमुख बैंक प्रबंधक राम विनोद कुमार के अनुसार, दिल्ली स्थित PNB मुख्यालय ने ट्रांसफर की गई रकम को रोक दिया है। उन्होंने कहा कि राशि वापस की जाएगी। बैंक ने मामले की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है।

अच्छेर शाखा के प्रबंधक सहित सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच CBI को सौंपी गई है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े लेनदेन और शिकायतों की पड़ताल कर रही हैं।

किसानों ने बैंक शाखा के बाहर किया प्रदर्शन

मंगलवार को सेक्टर पाई-1 के पास स्थित अच्छेर और आसपास के गांवों के किसानों ने बैंक शाखा के बाहर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उनकी जीवनभर की बचत और जमीन अधिग्रहण के बदले मिले मुआवजे की रकम से छेड़छाड़ की गई।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, बैंक खातों और एफडी में जमा रकम का इस्तेमाल उनकी जानकारी या अनुमति के बिना किया गया। किसानों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और उनकी रकम वापस दिलाने की मांग की है।

80 लाख रुपये की एफडी को लेकर क्या है आरोप?

अच्छेर निवासी अमरपाल ने बताया कि उन्होंने अपनी मां सुनीता देवी के नाम पर 40 लाख, 30 लाख और 10 लाख रुपये की तीन फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थीं। इसके अलावा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे के तौर पर मिली करीब 12 लाख रुपये की राशि उनकी मां के बचत खाते में जमा की गई थी।

अमरपाल के अनुसार, 10 लाख रुपये की एफडी की अवधि पूरी होने के बाद वह 22 अक्टूबर को बैंक पहुंचे थे। हालांकि, उन्हें 27 अक्टूबर को दोबारा आने के लिए कहा गया। बाद में उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि संबंधित एफडी में कोई रकम शेष नहीं है।

समय से पहले बंद की गईं एफडी?

अमरपाल ने आरोप लगाया कि बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर पता चला कि उनकी मां की एफडी 16 जून को ही समय से पहले बंद कर दी गई थीं और उनमें जमा रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी मां के बचत खाते से 10 लाख रुपये भी ट्रांसफर किए गए।

इन आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है। मामले में बैंक रिकॉर्ड, संबंधित खातों के लेनदेन और रकम ट्रांसफर किए जाने की परिस्थितियों की जांच अहम होगी।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, भ्रष्टाचार निरोधक टीम भी जांच में जुटी

ग्रेटर नोएडा के सहायक पुलिस आयुक्त संचित शर्मा ने बताया कि मामले में लोक सेवक या बैंकर द्वारा आपराधिक विश्वासघात से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक टीम मामले की जांच कर रही है।

फिलहाल, मामले में जांच जारी है। किसानों की शिकायतों, बैंक के रिकॉर्ड और कथित लेनदेन की पड़ताल के बाद ही धोखाधड़ी की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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