Tiger Shroff Firing Case में सभी 11 आरोपियों पर MCOCA, 4 के वॉयस सैंपल लेगी मुंबई क्राइम ब्रांच
Tiger Shroff Firing Case: मुंबई क्राइम ब्रांच ने फायरिंग मामले में सभी 11 आरोपियों पर MCOCA लगाया है। चार आरोपियों के वॉयस सैंपल लिए जाएंगे।
मुंबई : अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी 11 आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया है। इसके साथ ही चार आरोपियों के वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। क्राइम ब्रांच ने इस संबंध में अदालत को जानकारी दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फायरिंग के पीछे संगठित अपराध, कथित रंगदारी और किसी गैंग की साजिश की भूमिका थी या नहीं।
जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई थी फायरिंग
जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर 5 से 6 राउंड फायरिंग की गई थी। घटना के दौरान अभिनेता सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस केस की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही है।
सात आरोपियों की अदालत में पेशी
मामले में सात आरोपियों को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किए जाने की जानकारी है। इनमें कुणाल, सुमित, राधा और बबिता के अलावा अंकित, समीर और जतिन के नाम शामिल हैं। इन आरोपियों की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर जांच एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है। आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजना है या न्यायिक हिरासत में, इस पर फैसला अदालत करेगी।
वहीं, मुख्य शूटर बताए जा रहे फूल सिंह, रेहान अंसारी और ऋतिक कोटा को गिरफ्तार किए जाने के बाद 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में रखे जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस उनसे कथित साजिश, हथियारों की आपूर्ति और संभावित गैंग कनेक्शन को लेकर पूछताछ कर रही है।
सभी आरोपियों पर MCOCA क्यों लगाया गया?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने सभी 11 आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट यानी MCOCA लगाया है। यह कानून संगठित अपराध से जुड़े मामलों में लागू किया जाता है और इसके तहत जांच तथा जमानत से संबंधित प्रावधान सामान्य आपराधिक मामलों से अलग और सख्त हो सकते हैं। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि फायरिंग का उद्देश्य किसी व्यक्ति को डराना, कथित रंगदारी के लिए दबाव बनाना या किसी गैंग का प्रभाव दिखाना हो सकता है। पुलिस इन संभावनाओं की जांच कर रही है और साजिश से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है।