MP News : मध्यप्रदेश की विरासत को वैश्विक पहचान, UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुए 4 ऐतिहासिक स्थल
प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफाओं की भित्ति चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।
भोपाल। मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफाओं की भित्ति चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।
इन स्थलों के शामिल होने के बाद भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में मध्यप्रदेश के 19 स्थल हो गए हैं। यह प्रदेश की पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाता है।
पर्यटन को मिलेगा वैश्विक मंच
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में स्थान मिलना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा मिलने और विदेशी पर्यटकों की रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट किसी भी धरोहर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की प्रक्रिया का शुरुआती चरण होती है।
धार की बाघ गुफाएं: प्राचीन भित्ति चित्रों की अनमोल धरोहर
धार जिले में स्थित बाघ गुफाएं बौद्ध कालीन रॉक-कट गुफाओं का महत्वपूर्ण समूह हैं। विंध्य क्षेत्र के पास बाघ नदी के किनारे स्थित इन गुफाओं का निर्माण लगभग चौथी से छठी शताब्दी के बीच माना जाता है।
इन गुफाओं की सबसे बड़ी विशेषता यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं, जिनमें राजदरबार, जुलूस, संगीत, नृत्य और तत्कालीन सामाजिक जीवन के दृश्य देखने को मिलते हैं। बाघ गुफाओं की कला अजंता की चित्रकला परंपरा से जुड़ी होने के साथ अपनी अलग पहचान रखती है।
सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला: गोंड स्थापत्य का उदाहरण
सीहोर जिले में रातापानी अभयारण्य क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड शासनकाल की महत्वपूर्ण विरासत है। यह किला प्राकृतिक सुरक्षा और मजबूत स्थापत्य के लिए जाना जाता है।
किले में प्राचीन संरचनाएं, जल प्रबंधन प्रणाली, बावड़ियां और झीलें मौजूद हैं। यह स्थल गोंड साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य रणनीति और वास्तुकला को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुरैना के मंदिर समूह: नागर शैली की झलक
चंबल क्षेत्र के मुरैना जिले में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के बीच बने इन मंदिरों में शानदार नक्काशी, स्थापत्य कला और मूर्तिकला देखने को मिलती है। बटेश्वर क्षेत्र में मौजूद मंदिरों का विशाल समूह मध्य भारत की प्राचीन शिल्प परंपरा को दर्शाता है।
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकालीन विरासत
विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धार्मिक और राजनीतिक इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर हैं। यहां मौजूद 20 गुफाओं में प्राचीन शिल्पकला, मूर्तियां और शिलालेख मिलते हैं।
उदयगिरि की प्रसिद्ध वराह प्रतिमा भारतीय कला और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। यह स्थल हिंदू, जैन और अन्य धार्मिक परंपराओं के विकास को समझने में मदद करता है।
पहले से 15 स्थल यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल
मध्यप्रदेश के कई अन्य ऐतिहासिक स्थल पहले से ही यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं। इनमें ग्वालियर किला, भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, ओरछा का ऐतिहासिक समूह और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे स्थल शामिल हैं।
प्रदेश में अब मूर्त धरोहरों के साथ-साथ अमूर्त सांस्कृतिक विरासत भी अपनी पहचान बना रही है।
अमूर्त संस्कृति में भी मध्यप्रदेश की अलग पहचान
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत केवल ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं है। प्रदेश की नर्मदा परिक्रमा, भगोरिया नृत्य, गोंड चित्रकला, मैहर बैंड, पारंपरिक लौह गलाने की तकनीक और निमाड़ी व्यंजन जैसी परंपराएं भी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती हैं।
यूनेस्को की सूची में नए स्थलों का शामिल होना मध्यप्रदेश की प्राचीन विरासत और संस्कृति को दुनिया के सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।