भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े मामले में जबलपुर हाईकोर्ट का अहम आदेश सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने वर्ष 2001 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मियों के प्रमोशन में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार को विचार करने और 60 दिनों के भीतर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश से प्रदेश के हजारों पुराने शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

19 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई

यह मामला प्रमोशन में TET की अनिवार्यता को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा था। प्रमोशन की मांग को लेकर 19 शिक्षकों ने याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को मामले पर विचार कर निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए।

1997 से 1999 के बीच नियुक्त शिक्षकों को उम्मीद

इस मामले का असर मुख्य रूप से उन शिक्षकों पर पड़ सकता है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 1999 के बीच हुई थी। उपलब्ध जानकारी में करीब 40 से 45 हजार शिक्षकों को संभावित लाभ मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ मिलेगा या नहीं, यह राज्य सरकार के निर्णय और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

TET की अनिवार्यता पर क्या है मामला?

शिक्षकों के प्रमोशन में TET की अनिवार्यता को लेकर पहले भी कानूनी बहस होती रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में प्रमोशन के संदर्भ में TET की आवश्यकता का मुद्दा सामने आया था। ऐसे में पुराने शिक्षाकर्मियों के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह संबंधित परिस्थितियों और नियमों पर विचार कर उचित निर्णय ले।

अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार को 60 दिनों के भीतर इस मामले में निर्णय लेना है। शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार के फैसले से उनके प्रमोशन का रास्ता स्पष्ट हो सकेगा। 

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