भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8वीं तक के करीब 56 लाख विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग अब बच्चों को तैयार और सिली हुई ड्रेस देने के बजाय यूनिफॉर्म की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर करने के विकल्प पर आगे बढ़ रहा है। इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

ड्रेस की राशि सीधे खाते में भेजने की तैयारी

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यूनिफॉर्म वितरण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक के बाद विभाग ने बच्चों के खातों में सीधे राशि भेजने के विकल्प पर सहमति जताई है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि प्रति विद्यार्थी कितनी राशि दी जाएगी। विभाग संशोधित प्रस्ताव तैयार कर इसे कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखेगा। अंतिम फैसला कैबिनेट की स्वीकृति के बाद ही होगा।

350 करोड़ रुपये का टेंडर क्यों अटका?

बच्चों को दो जोड़ी सिली हुई यूनिफॉर्म देने के लिए राज्य सरकार ने पहले व्यवस्था बनाई थी। इसके तहत मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से करीब 350 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। यूनिफॉर्म की सिलाई और सप्लाई का काम निजी कंपनी के माध्यम से कराया जाना था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया और अदालत से अंतरिम रोक लगने के बाद यूनिफॉर्म तैयार करने तथा उसकी सप्लाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसी के बाद विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना पड़ा।

56 लाख बच्चों तक ड्रेस पहुंचाना आसान नहीं

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े स्तर पर बच्चों को समय पर यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना है। हर विद्यार्थी की नाप लेना, उसी के मुताबिक ड्रेस तैयार करना और फिर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के स्कूलों तक पहुंचाना लंबी प्रक्रिया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए एक जैसी गुणवत्ता, रंग और डिजाइन की यूनिफॉर्म तैयार कराने में भी समय लगेगा। शैक्षणिक सत्र आगे बढ़ने के साथ विभाग के सामने समय का दबाव भी बढ़ता गया।

नया सत्र शुरू होने के बाद भी इंतजार

अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के बच्चों को नई यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी है। ऐसे में विभाग को आशंका है कि यदि सिली हुई ड्रेस की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाती है, तो बच्चों तक यूनिफॉर्म पहुंचने में और समय लग सकता है। इसी वजह से DBT मॉडल को अपेक्षाकृत तेज और व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है। इस व्यवस्था में बच्चों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में तय राशि भेजी जा सकती है, जिससे वे स्वयं निर्धारित मानकों के अनुसार यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे।

राशि और भुगतान की तारीख पर अभी फैसला बाकी

फिलहाल सरकार ने केवल DBT के प्रस्तावित विकल्प पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। प्रति बच्चा कितनी राशि मिलेगी, भुगतान कब होगा और किन शर्तों के साथ राशि जारी की जाएगी, इन सवालों का जवाब कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। स्कूल शिक्षा विभाग संशोधित प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है और माना जा रहा है कि जल्द ही इसे मंत्रिपरिषद के सामने रखा जा सकता है।

अभिभावकों की नजर कैबिनेट के फैसले पर

यूनिफॉर्म के इंतजार में बैठे लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए अब कैबिनेट का फैसला महत्वपूर्ण होगा। अगर DBT प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो सिली हुई यूनिफॉर्म की मौजूदा व्यवस्था की जगह बच्चों को यूनिफॉर्म खरीदने के लिए सीधे आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

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