MP में इन पेड़ों पर लगा बैन, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
राज्य में पहले से लगे इन पेड़ों को हटाने और उनकी जगह स्थानीय, देशज तथा पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने कोनोकार्पस (Conocarpus) और सप्तपर्णी (Alstonia scholaris) जैसे पेड़ों के रोपण पर रोक लगाने का फैसला किया है। राज्य में पहले से लगे इन पेड़ों को हटाने और उनकी जगह स्थानीय, देशज तथा पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का यह कदम जनस्वास्थ्य और स्थानीय पारिस्थितिकी से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
कोनोकार्पस एक तेजी से बढ़ने वाली विदेशी प्रजाति है, जिसे शहरी क्षेत्रों में हरियाली और लैंडस्केपिंग के लिए लगाया जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट से संबंधित प्रक्रिया में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने इस प्रजाति के संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन किया था। समिति ने इसके पारिस्थितिक असर और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को रेखांकित किया था।
एलर्जी और सांस संबंधी समस्याओं को लेकर चिंता
इन पेड़ों के परागकणों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई गई हैं। रिपोर्टों में इनके कारण कुछ लोगों में एलर्जी और सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की आशंका का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है और इसे सभी लोगों के लिए समान रूप से हानिकारक मानना उचित नहीं होगा।
स्थानीय पर्यावरण पर भी असर
कोनोकार्पस को लेकर मुख्य पर्यावरणीय चिंता इसकी तेज वृद्धि और स्थानीय जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव से जुड़ी है। विशेषज्ञों ने इसे ऐसी विदेशी प्रजाति के रूप में चिन्हित किया है जो स्थानीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के लिए कम अनुकूल हो सकती है। इसी वजह से देशज प्रजातियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
पहले से लगे पेड़ों के लिए भी निर्देश
सरकार के निर्देश सिर्फ नए पौधे लगाने तक सीमित नहीं हैं। मध्य प्रदेश में पहले से लगे कोनोकार्पस और सप्तपर्णी पेड़ों को हटाने और उनके स्थान पर स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य शहरी हरियाली को बनाए रखते हुए ऐसी प्रजातियों को बढ़ावा देना है, जो स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी के अनुकूल हों।
MP बना ऐसा कदम उठाने वाला राज्यों में पांचवां
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश इस तरह का कदम उठाने वाले राज्यों में पांचवां है। इससे पहले कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम में भी कोनोकार्पस को लेकर प्रतिबंध या नियंत्रण संबंधी कदम उठाए जा चुके हैं।
हरियाली के साथ स्थानीय प्रजातियों पर जोर
राज्य सरकार का फोकस अब ऐसी प्रजातियों के रोपण पर है, जो स्थानीय जैव-विविधता को मजबूत करने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करें। यानी हरियाली बढ़ाने के साथ यह भी देखा जाएगा कि शहरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाने वाले पेड़ स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए कितने अनुकूल हैं।
मध्य प्रदेश का यह फैसला शहरी हरियाली की नीति में बदलाव का संकेत है, जिसमें केवल तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों के बजाय स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता देने की दिशा में जोर दिया जा रहा है।