MP News: मध्य प्रदेश में जेलों की व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास पर जोर देने के लिए राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। प्रदेश में मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी पुनर्वास अधिनियम-2024 को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए चार आईएएस अधिकारियों की समिति गठित की गई है। समिति को 10 कार्य दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में अधिनियम के प्रावधानों, नियमों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुझाव दिए जाएंगे।

चार अधिकारियों की समिति करेगी अधिनियम की समीक्षा

राज्य सरकार की ओर से गठित समिति में जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद्र गुप्ता, वित्त विभाग के सचिव लोकेश कुमार जाटव, विधि कार्य विभाग के सचिव मुकेश कुमार और जेल विभाग के उपसचिव कमल नागर को शामिल किया गया है। समिति अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का अध्ययन करेगी और इसके लागू करने के लिए जरूरी नियमों एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अपनी सिफारिशें देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्य सचिव के स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

2024 में विधानसभा से पारित हुआ था कानून

मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी पुनर्वास अधिनियम-2024 को राज्य विधानसभा ने पारित किया था। इसे 8 अगस्त 2024 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और 12 अगस्त 2024 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस अधिनियम में कुल 68 धाराएं और 18 अध्याय शामिल हैं। कानून को मंजूरी मिलने के बावजूद इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देना बाकी है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।

सजा के साथ सुधार और पुनर्वास पर रहेगा जोर

नए अधिनियम का उद्देश्य जेल व्यवस्था को केवल दंड और अनुशासन तक सीमित न रखकर बंदियों के सुधार और पुनर्वास से जोड़ना है। इसके तहत बंदियों को शिक्षा, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही परिवार के सदस्यों से संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था और बंदियों के अधिकारों को भी महत्व दिया गया है। इसका मकसद बंदियों को रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है।

पुराने जेल कानूनों की जगह लेगा नया अधिनियम

नए कानून के लागू होने के बाद जेलों से संबंधित पुराने तीन कानूनों की जगह नई व्यवस्था लागू होगी। इसके जरिए जेल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अधिनियम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीमेडिसिन, मोबाइल कनेक्टिविटी के माध्यम से संपर्क और कौशल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

समिति की रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

सरकार का उद्देश्य जेलों में व्यवस्थागत सुधार के साथ बंदियों के अधिकारों और पुनर्वास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। चार आईएएस अधिकारियों की समिति की रिपोर्ट इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम होगी। समिति के सुझावों के आधार पर नियमों को अंतिम रूप देने और अधिनियम के क्रियान्वयन की आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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