भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास, किसानों, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रदेश के विकास को गति देने के उद्देश्य से करीब 27,050 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। बैठक में जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन, खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू करने और विभिन्न विभागों की योजनाओं को जारी रखने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बनेगी विशेष कंपनी

प्रदेश में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली ‘जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ के गठन को मंजूरी दी। कंपनी को शुरुआती पूंजी के रूप में राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। इसके संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी।

कंपनी का मुख्य उद्देश्य कॉरिडोर से जुड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों का समेकित विकास करना होगा। इसके तहत औद्योगिक पार्क, फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी और आईटी पार्क सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। साथ ही आवासीय और सामाजिक अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा।

कंपनी को भूमि प्रबंधन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग और भू-आवंटन जैसे कार्यों की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। हालांकि, मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण कंपनी के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं होगा। इसका फोकस आर्थिक हब के भीतर साझा और आंतरिक अधोसंरचना विकसित करने पर रहेगा।

सोयाबीन किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाएगी भावांतर योजना

कैबिनेट ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा के तहत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को सोयाबीन की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने में मदद करना है।

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना होगा। अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन बेचने की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। योजना के तहत भुगतान किसान के पंजीकृत रकबे और पिछले वर्ष निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा।

भावांतर राशि का निर्धारण मंडियों में सोयाबीन के बिक्री मूल्य और निर्धारित मॉडल रेट के आधार पर होगा। बिक्री मूल्य एमएसपी के बराबर या उससे अधिक होने पर प्रतिपूर्ति नहीं मिलेगी। वहीं, निर्धारित शर्तों के अनुसार एमएसपी और बिक्री मूल्य अथवा मॉडल रेट के बीच के अंतर की राशि किसानों के पंजीकृत बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।

योजना के संचालन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां गठित होंगी। भुगतान के लिए मंडी बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष का उपयोग किया जाएगा। कोष में राशि कम पड़ने पर राज्य सरकार मंडी बोर्ड को एक वर्ष के लिए 1,500 करोड़ रुपये की साख सीमा उपलब्ध कराएगी।

चार जिलों की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,076 करोड़ रुपये मंजूर

किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कैबिनेट ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की चार सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी।

बुरहानपुर जिले की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 922.91 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे खकनार तहसील के 42 गांवों की लगभग 17,700 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

रायसेन जिले की बारना वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 82.49 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के तहत नहरों का विस्तार, सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण किया जाएगा। वर्तमान में इससे लगभग 91,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है।

मंदसौर जिले की कयामपुर-सीतामऊ सिंचाई परियोजना के लिए 750.83 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे लगभग 1,12,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। वहीं, सिंगरौली जिले की चितरंगी सिंचाई परियोजना के लिए 1,320.14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके जरिए 32,125 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा देने की योजना है।

94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन पर खर्च होंगे 241.88 करोड़

जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों के परिवहन के लिए कैबिनेट ने 241.88 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। विद्यार्थियों के परिवहन की दर 10,000 रुपये प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही हर वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि भी की जाएगी।

परिवहन व्यवस्था को आउटसोर्सिंग के माध्यम से आईटी आधारित प्लेटफॉर्म और निगरानी प्रणाली के जरिए संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के आवागमन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

चार नए जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खुलेंगे

निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना के लिए कैबिनेट ने नए पदों के सृजन और पदों के प्रतिस्थापन से जुड़ा प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत 24 नए पदों के सृजन के साथ 12 पदों के प्रतिस्थापन की स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा केंद्र सरकार की समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत प्रावधानों के अनुसार आउटसोर्सिंग के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराने की भी मंजूरी दी गई।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग की योजनाओं के लिए 15,557 करोड़ रुपये

कैबिनेट ने 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक विधि एवं विधायी कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को जारी रखने के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।

इस राशि में प्रशासनिक अधिकरण, न्यायालयों में कंप्यूटरीकरण और विशेष न्यायालयों से संबंधित 11 योजनाओं के लिए 1,624.69 करोड़ रुपये शामिल हैं। विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

राज्य के जिला एवं सत्र न्यायालयों और अन्य अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और कार्यालय खर्च के लिए 12,252.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए 1,530 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

राज्य सूचना आयोग के लिए 71.81 करोड़ रुपये की मंजूरी

सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत राज्य सूचना आयोग के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजनाओं को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी गई। इसके लिए कुल 71.81 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

इसमें राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों के लिए 69.61 करोड़ रुपये तथा विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 2.20 करोड़ रुपये शामिल हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन और आयुष महाविद्यालयों के लिए 5,232 करोड़ रुपये से अधिक

प्रदेश में आयुष चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,697.62 करोड़ रुपये मंजूर किए। इस योजना के तहत आयुष चिकित्सालयों, औषधालयों और महाविद्यालयों के विकास एवं स्थापना के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है।

इसके अतिरिक्त आयुष विभाग की महाविद्यालयों और चिकित्सालयों से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इसमें आयुष महाविद्यालयों के लिए 3,072.54 करोड़ रुपये, शासकीय होम्योपैथी महाविद्यालय के लिए 280.05 करोड़ रुपये और यूनानी महाविद्यालय के लिए 182.20 करोड़ रुपये शामिल हैं। आयुर्वेद सम्मान पुरस्कार के लिए भी 31 लाख रुपये मंजूर किए गए।

इन योजनाओं के तहत प्रदेश में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संस्थानों के संचालन, विकास और भवन निर्माण पर खर्च किया जाएगा।

सरकारी स्कूलों और छात्रावासों के विकास के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये

प्रदेश के सरकारी स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण एवं विस्तार के लिए कैबिनेट ने 2,875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।

इसके तहत सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर कक्ष, प्राचार्य कक्ष और स्टाफ रूम जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरैक्टिव पैनल और सुरक्षा कैमरों की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है।

सरकार के अनुसार, इन प्रस्तावों का उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना और सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करना है।

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