नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत की लॉन्ग डिस्टेंस रनर सीमा कुमारी ने शानदार उपलब्धि हासिल की है। महिलाओं की 10,000 मीटर रेस में सीमा ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने यह रेस 32:41.54 सेकंड के समय के साथ पूरी की।

सीमा की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति की कहानी है। इस मेडल के साथ उन्होंने महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में भारत के 16 साल लंबे इंतजार को भी खत्म कर दिया।

12 साल की उम्र में खोया पिता का साथ, फिर भी नहीं टूटा हौसला

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के एक छोटे से गांव से आने वाली सीमा कुमारी का जीवन आसान नहीं रहा। महज 12 साल की उम्र में उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और घर की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई थीं।

सीमा ने खेती-बाड़ी और मवेशी चराने जैसे कामों में परिवार का हाथ बंटाया। उस दौर में उनके पास दौड़ने के लिए अच्छे जूते तक नहीं थे, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। गांव की पगडंडियों पर नंगे पैर दौड़ते हुए उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की।

मां ने बेटी के सपनों को दी उड़ान

सीमा के संघर्ष में उनकी मां का बड़ा योगदान रहा। आर्थिक परेशानियों के बावजूद मां ने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की। जब सीमा को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला, तो उनकी मां ने यात्रा और अन्य खर्चों के लिए अपनी जमा पूंजी तक लगा दी। इसी समर्थन और सीमा की मेहनत ने उन्हें बड़े मंच तक पहुंचाया।

2017 से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

सीमा कुमारी ने साल 2017 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू की। बैंकॉक में आयोजित एशियन अंडर-18 चैंपियनशिप में उन्होंने 3000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यूथ ओलंपिक, एशियन जूनियर चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स जैसे बड़े आयोजनों में भी उन्होंने हिस्सा लिया।

क्रॉस कंट्री और मैराथन में भी दिखाया दम

सीमा ने 2024 में हॉन्गकॉन्ग में आयोजित एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद उन्होंने 2025 में एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 5000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।

एशियन गेम्स में तिरंगा लहराकर रचा इतिहास

अब एशियन गेम्स 2026 में 10,000 मीटर रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सीमा कुमारी ने अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि संसाधनों की कमी के बावजूद मेहनत, लगन और हौसले के दम पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

Tags: