वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत को रूस से कच्चा तेल व गैस खरीद पर लगने वाले कड़े अमेरिकी टैरिफ से पूरी तरह छूट दे दी है। यह छूट लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 के तहत दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर दंडात्मक आर्थिक प्रतिबंध लगाना था।

100% टैरिफ की तलवार से बची भारतीय अर्थव्यवस्था

इस अमेरिकी कानून के तहत प्रावधान था कि रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े देशों (जिनमें भारत और चीन शामिल हैं) से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी Tariff लगाया जा सकता है। ट्रम्प ने इस एक्ट की धारा 115 का विशेष अधिकार इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस को रिपोर्ट सौंपी और स्पष्ट किया कि भारत को इस टैरिफ से राहत देना खुद अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

अमेरिका-रूस के बीच हुई बड़ी डीजल डील

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रम्प ने खुद घोषणा की कि अमेरिका ने रूस के साथ एक बड़ी डीजल डील की है। इस समझौते के तहत रूस तुरंत अमेरिका को 3,00,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा।

इसके बाद नवंबर में 5,00,000 टन और फिर जल्द ही 10 लाख (1 मिलियन) टन अतिरिक्त डीजल भेजा जाएगा। ट्रम्प के अनुसार, आने वाले समय में कुल 30 लाख (3 मिलियन) टन डीजल आपूर्ति की संभावना है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिया बयान

अमेरिका-रूस के बीच हुई इस कमर्शियल डील और भारत को मिली टैरिफ छूट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम दो देशों के बीच हुए व्यावसायिक समझौतों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। हमारा रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि हम वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता और कीमतों के संतुलन की वकालत करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत विदेश नीति और वाशिंगटन के सामने उठाई गई चिंताओं के कारण ही अमेरिका को यह टैरिफ राहत का कदम उठाना पड़ा है।

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