Sonam Wangchuk : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले सोनम वांगचुक- यह संघर्ष का अंत नहीं, जवाबदेही और सुधारों की शुरुआत है
Sonam Wangchuk : नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की जीत बताते हुए इसका श्रेय देशभर के युवाओं और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले नागरिकों को दिया। वांगचुक ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सामूहिक जनशक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है।
यह संघर्ष का अंत नहीं, नई शुरुआत है
अपने सोशल मीडिया संदेश में वांगचुक ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का उदाहरण है। उन्होंने लिखा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और अब अगला लक्ष्य व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना होना चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल बदलाव की मांग करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना भी है।
युवाओं और नागरिकों के साहस की सराहना
वांगचुक ने देशभर के युवाओं और आम नागरिकों के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बिना डर के अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं और शांतिपूर्ण विरोध में शामिल सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
26 दिन के अनशन के बाद खत्म किया था उपवास
सोनम वांगचुक ने हाल ही में 26 दिनों तक चले अपने अनशन को समाप्त किया था। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और संवाद जारी रखने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना उपवास खत्म किया। इसके बाद से वह लगातार आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अब सुधारों पर रहेगा फोकस
वांगचुक ने अपने संदेश के अंत में स्पष्ट किया कि अब आंदोलन का अगला चरण शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने का होगा। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केवल फैसले लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना जरूरी है जिससे भविष्य में इस तरह की परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों।