पीएम मोदी से मिलने क्यों बेताब हो रहे हैं ट्रंप! अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दिया बड़ा अपडेट
PM Modi Donald Trump meeting G20 Summit 2026: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि G20 में ट्रंप पीएम मोदी से मिलना चाहते हैं। भारत-US ट्रेड डील और ट्रंप के भारत दौरे पर भी बड़ा अपडेट आया है।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्तों में आने वाले महीनों में और तेजी देखने को मिल सकती है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक इंटरव्यू में दोनों देशों के रणनीतिक, व्यापारिक और रक्षा संबंधों को लेकर कई अहम बातें बताई हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के दौरान जिन चुनिंदा वैश्विक नेताओं से मुलाकात करना चाहते हैं, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमुख नामों में शामिल हैं।
सर्जियो गोर ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल का भी जिक्र किया और संकेत दिया कि G20 के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच मुलाकात सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रह सकती। उनके मुताबिक, भारत-अमेरिका के रिश्ते रणनीतिक स्तर पर लगातार मजबूत हो रहे हैं।
G20 में पीएम मोदी से मुलाकात चाहते हैं ट्रंप
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन को लेकर अमेरिका की विशेष तैयारियां हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी शामिल है।
गोर ने दोनों नेताओं के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा का महत्व केवल G20 की सामूहिक बैठक तक सीमित नहीं होगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत का यह महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
भारत दौरे पर फिर आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप
सर्जियो गोर ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल फिर भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने ट्रंप के 2020 के भारत दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति उस यात्रा और भारत के लोगों को बेहद आत्मीयता से याद करते हैं।
गोर के अनुसार, ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "प्रिय मित्र" मानते हैं। ऐसे में भविष्य में उनकी भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और नई दिशा दे सकती है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द हो सकता है फैसला
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी अमेरिकी राजदूत ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद समझौते पर कुछ काम नए सिरे से करना पड़ रहा है, लेकिन दोनों देश डील को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं।
गोर ने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
240 अरब डॉलर के व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
सर्जियो गोर ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 240 अरब डॉलर है। दोनों देशों के नेताओं ने आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देश तकनीक, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
अमेरिकी राजदूत ने भारत में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, डेटा सेंटर और AI सेंटर जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों की भारत में बढ़ती दिलचस्पी का उल्लेख किया।
भारत को अमेरिका का भरोसेमंद रक्षा साझेदार बताया
रक्षा क्षेत्र में भी सर्जियो गोर ने भारत को अमेरिका का एक विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने अत्याधुनिक सैन्य उपकरण हर देश को उपलब्ध नहीं कराता। भारत के साथ रक्षा सहयोग इस भरोसे को दर्शाता है। गोर ने जेवलिन मिसाइल परियोजना, अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी और अन्य रक्षा उपकरणों को लेकर जारी बातचीत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका के साथ किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। इससे दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
भारत आएंगे कई बड़े अमेरिकी अधिकारी
अमेरिकी राजदूत ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक और महत्वपूर्ण संकेत दिया। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के लगातार दौरों का "आदी हो जाना चाहिए"।
उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्टूबर में फिर भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा अमेरिका के कई अन्य कैबिनेट स्तर के अधिकारियों और तीन अमेरिकी राज्यों के गवर्नरों के भी साल खत्म होने से पहले भारत आने की संभावना है।
इससे साफ संकेत मिलता है कि वाशिंगटन नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि विभिन्न स्तरों पर संपर्क और सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
क्वाड समिट को लेकर भी बड़ी तैयारी
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक समूह क्वाड (Quad) को लेकर भी सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी उन्होंने बताया कि अमेरिका आगामी क्वाड बैठकों को लेकर काफी उत्साहित है। सिडनी में होने वाली क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक में मार्को रुबियो के शामिल होने की उम्मीद है। इसके साथ ही चारों देश इस साल के अंत तक क्वाड लीडर्स समिट आयोजित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह दौर?
सर्जियो गोर के बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश हो रही है। एक तरफ दोनों देश व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रक्षा, AI, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और फार्मा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।
G20 में पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश और क्वाड समिट की तैयारियां आने वाले महीनों को दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना सकती हैं।