नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मंजूरी दे दी, जिसमें चुनाव आयोग के टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

कपिल सिब्बल ने की जल्द सुनवाई की मांग

तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मामले की जल्द सुनवाई की मांग रखी। सिब्बल ने कहा, "वे एक नोटिफिकेशन जारी करते हैं और नोटिफिकेशन के बीच में ही वे चुनाव चिह्न को फ्रीज कर देते हैं। यह क्या हो रहा है? हम चाहते हैं कि इस मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।"

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम दिए

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। इससे एक दिन पहले आयोग ने अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया था। साथ ही विवाद पर अंतिम फैसला आने तक पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया था।

ममता ने फैसले को बताया था लोकतंत्र का काला दिन

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। 18 सितंबर को उन्होंने पार्टी का नाम और 'जोड़ा घास-फूल' चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान खोने की तुलना मां के बच्चे को खोने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का "काला दिन" बताया था।

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