ECI में अंदरूनी खींचतान? 10 महीने में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने जताई आपत्ति, चुनाव आयोग ने दी सफाई
जुलाई 2026 में IT विभाग के काम और अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़...
नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) में SIR को लेकर अंदरूनी मतभेद सामने आने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और निर्देशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची से नाम हटाने और IT सिस्टम के नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
दो आयुक्तों ने फैसलों पर उठाए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए जाने पर आपत्ति जताई। फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी दोनों ने सवाल उठाए। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट में दावा है कि इसमें SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ी गई, जबकि दोनों आयुक्तों ने इसके लिए नियमों में बदलाव की जरूरत बताई थी।
वोटर डेटा के IT सिस्टम पर भी विवाद
ECI के ECINet सिस्टम को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, उनका कहना था कि मतदाता सूची तैयार करने वाले जमीनी अधिकारियों यानी ERO की सिस्टम तक पहुंच सीमित हो रही है। उन्होंने वोटर डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाए। गोवा में 97 ऐसे मतदाताओं का मामला सामने आया, जिन्हें ERO ने योग्य माना, लेकिन सॉफ्टवेयर में उनके नाम दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था।
कैबिनेट सेक्रेटरी तक पहुंचा मामला
जुलाई 2026 में IT विभाग के काम और अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने अलग-अलग कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखकर इस बदलाव पर आपत्ति जताई। इसके बाद 9 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई। रिपोर्ट के अनुसार, करीब चार महीने में यह तीनों की पहली पूर्ण बैठक थी।
कानून में सर्वसम्मति का प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। 2023 के कानून की धारा 18 के मुताबिक आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से होना चाहिए। मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर फैसला लिया जा सकता है। इसी प्रावधान के चलते आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ECI ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
वहीं, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन मतभेदों की खबरों पर सफाई दी है। उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने वोटर लिस्ट की प्रक्रिया के दौरान कुछ मुद्दों पर चिंता जरूर जताई थी, लेकिन SIR समेत आयोग के सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि कानून में भी जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से फैसला लेने और मतभेद की स्थिति में बहुमत की व्यवस्था है।