नई दिल्ली। भारत ने अगली पीढ़ी की 6G तकनीक के विकास और परिनियोजन में भारत अब अमेरिका समेत 24 अन्य देशों के साथ उस अंतरराष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा बन गया है, जिसका उद्देश्य 6G नेटवर्क के विकास को साझा सुरक्षा हितों के अनुरूप आगे बढ़ाना, प्रतिस्पर्धा मजबूत करना और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। विभाग ने कहा कि भारत के इस पहल में शामिल होने से 6G के क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

भारत-अमेरिका के बीच 6G पर अहम चर्चा

यह घोषणा अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना के चैपल हिल में आयोजित G20 इनोवेशन मिनिस्टर्स की बैठक के दौरान हुई। बैठक में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक और भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने बताया कि लुटनिक ने जितिन प्रसाद के साथ 6G के भविष्य को लेकर चर्चा की। इस दौरान भारत के अमेरिका और अन्य 24 देशों के साथ वैश्विक 6G प्रयास में शामिल होने की बात सामने आई।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अगली पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्क साझा सुरक्षा हितों के अनुरूप विकसित हों। साथ ही, इसका मकसद वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना और 6G से जुड़ी नई तकनीकों में नवाचार को बढ़ावा देना है।

जितिन प्रसाद ने किया भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

जितिन प्रसाद ने 1 और 2 सितंबर को चैपल हिल में हुई G20 इनोवेशन मिनिस्टर्स की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस बैठक का आयोजन अमेरिकी वाणिज्य विभाग और व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी (OSTP) ने किया था।

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय प्रतिनिधिमंडल में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार के अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के वरिष्ठ अधिकारी और अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी शामिल रहे।

G20 बैठक में जारी हुआ इनोवेशन मिनिस्ट्रियल स्टेटमेंट

बैठक के अंत में G20 देशों के मंत्रियों ने इनोवेशन मिनिस्ट्रियल स्टेटमेंट जारी किया। इसमें माना गया कि उभरती हुई तकनीकों में लोगों के जीवन में खुशहाली बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और नए अवसर पैदा करने की बड़ी क्षमता है।

6G जैसी अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी तकनीक को इसी व्यापक तकनीकी बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। 6G के विकास में वैश्विक सहयोग से रिसर्च, मानकों और नई दूरसंचार तकनीकों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सेमीकंडक्टर और AI पर भी भारत-अमेरिका की बातचीत

G20 इनोवेशन मिनिस्ट्रियल बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ 6G ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर जैसे अहम क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई। जितिन प्रसाद और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया।

प्रसाद ने SM2.0 में अमेरिकी निवेश बढ़ाने की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ AI टेक्नोलॉजी साझेदारी को मजबूत करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके अलावा AI सुरक्षा के लिए एक तंत्र को लेकर भी चर्चा हुई।

भारत के लिए AI डेटा सेंटर क्यों हैं अहम?

जितिन प्रसाद ने कहा कि सेमीकंडक्टर और AI डेटा सेंटर भारत जैसी तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बिल्डिंग ब्लॉक्स हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने इन क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर विचार किया है।

भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसके लिए बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सेंटर और उन्नत सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। ऐसे में अमेरिका के साथ तकनीकी सहयोग भारत की डिजिटल और AI महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत का वैश्विक 6G पहल में शामिल होना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आने वाले वर्षों में 6G रिसर्च, तकनीकी मानकों और नेटवर्क के विकास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

Tags: