कैसे बना भारतीय रुपए का ₹ निशान: 3,331 डिजाइनों में से चुना गया था एक डिजाइन, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी
पहले 'Rs' लिखकर दर्शाते थे रुपया
नई दिल्ली: चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल और ऑनलाइन पेमेंट तक आज हर जगह भारतीय रुपए का निशान ₹ दिखाई देता है। लेकिन आजादी के कई दशक बाद तक भारतीय मुद्रा को 'Rs' या 'Re' लिखकर परिभाषित किया जाता था। दुनिया के कई देशों की करेंसी के अपने खास निशान या लोगो थे, लेकिन भारतीय रुपए की अलग पहचान नहीं थी। इसी जरूरत को देखते हुए सरकार ने अपना करेंसी सिंबल तैयार करने का फैसला किया।
2009 में हुई थी राष्ट्रीय प्रतियोगिता
भारत सरकार ने 5 मार्च 2009 को रुपए का प्रतीक चिन्ह बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता शुरू की। इसमें देशभर के लोगों से डिजाइन मांगे गए। प्रतियोगिता में 3,331 से ज्यादा डिजाइन मिले। इनमें से पांच डिजाइन शॉर्टलिस्ट किए गए। इसके बाद जूरी ने बिना डिजाइनरों के नाम देखे उनका मूल्यांकन किया, ताकि फैसला निष्पक्ष रहे।
डी. उदय कुमार के डिजाइन को मिली जीत
तमिलनाडु के डी. उदय कुमार का डिजाइन सबसे अलग माना गया। उस समय वे IIT बॉम्बे के इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर में पीएचडी कर रहे थे। पेशे से आर्किटेक्ट उदय कुमार ने भारतीय संस्कृति और आधुनिक डिजाइन को मिलाकर रुपए का नया निशान तैयार किया। विजेता बनने पर उन्हें 2.5 लाख रुपए का पुरस्कार भी मिला।
'र' और 'R' को मिलाकर बनाया निशान
₹ के डिजाइन में देवनागरी के अक्षर 'र' और अंग्रेजी के अक्षर 'R' का मेल है। इसके ऊपर बनी दो समानांतर रेखाएं भारतीय तिरंगे की याद दिलाती हैं। इन्हें आर्थिक संतुलन और समानता का प्रतीक भी माना जाता है। इस तरह डिजाइन में भारतीय पहचान और आधुनिकता दोनों को जगह दी गई।
15 जुलाई 2010 को मिली आधिकारिक पहचान
सरकार ने 15 जुलाई 2010 को रुपए के नए प्रतीक चिन्ह को आधिकारिक रूप से अपनाया। इसके बाद भारतीय रुपया दुनिया की उन प्रमुख मुद्राओं में शामिल हो गया, जिनकी अपनी अलग पहचान है। आज यह निशान बैंक, शेयर बाजार, दुकानों, मोबाइल और डिजिटल पेमेंट में इस्तेमाल होता है। भारतीय रुपए का अंतरराष्ट्रीय कोड INR है।