Ethanol Policy: चीनी होगी सस्ती? इथेनॉल पॉलिसी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव
Ethanol Policy: सरकार ने इथेनॉल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। गन्ने के रस, चीनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को नए टेंडर से बाहर रखा गया है।
Ethanol Policy: पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के लक्ष्य के बीच सरकार ने इथेनॉल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के नए टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को जगह नहीं दी गई है। वहीं, मक्के से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को मिलने वाला प्रोत्साहन भी कम कर दिया गया है। इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जारी रखना है।
करीब 1100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के लिए टेंडर
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 16 अक्टूबर को पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों की ओर से नए इथेनॉल खरीद टेंडर के तहत बोलियां आमंत्रित कीं। नवंबर से शुरू होने वाले 2026-27 सप्लाई ईयर के लिए करीब 1100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद प्रस्तावित है। इस खरीद का उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की जरूरत पूरी करना है। नए टेंडर में कच्चे माल के चयन और इथेनॉल उत्पादकों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन में बदलाव किया गया है।
गन्ने और चीनी से बने इथेनॉल को टेंडर से बाहर रखा
टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक, सरकार ने 2026-27 सप्लाई ईयर में इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को समाप्त करने का निर्देश दिया है। इसी के तहत गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं। इस फैसले से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को दूसरे कच्चे माल पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है।
मक्का, टूटे चावल और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को अनुमति
नए टेंडर में मक्के, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा खरीदे गए अतिरिक्त चावल और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाने की अनुमति दी गई है। इससे अनाज आधारित इथेनॉल और गन्ने के कुछ उप-उत्पादों की भूमिका बढ़ सकती है। सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोल में पारंपरिक ईंधन की खपत कम करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।
मक्के से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव
टेंडर में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि 71.86 रुपये से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। यानी इसमें 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती हुई है। इससे मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादकों की लागत और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव कंपनियों की उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमत और खरीद की शर्तों पर निर्भर करेगा।
चीनी उत्पादन घटने की आशंका के बीच सरकार का फैसला
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन घटने की स्थिति में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला खाद्य जरूरतों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के सामने नई चुनौती
भारत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। लेकिन इथेनॉल उत्पादन और खाद्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। नए टेंडर से इथेनॉल उत्पादकों के लिए कच्चे माल के विकल्प बदलेंगे और मक्का तथा चावल जैसे अनाज की मांग पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई खरीद नीति से चीनी की उपलब्धता, इथेनॉल उत्पादन की लागत और पेट्रोल में 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।