नई दिल्ली: कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की मतदान के अधिकार को लेकर कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए CEC पर सवाल उठाए। यह बयान 4 अक्टूबर 2026 को सामने आया।

जयराम रमेश ने कहा- संविधान की भावना का उल्लंघन

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच X पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। उन्होंने कहा, “अब इस साहसी न्यायविद ने जोरदार ढंग से अपनी राय व्यक्त की है कि वोट देने का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। यह निर्णायक रूप से साबित करता है कि CEC- जो खुद एक संवैधानिक पदाधिकारी हैं- ने संविधान का अक्षरशः और उसकी भावना दोनों का उल्लंघन किया है।”

वोटिंग अधिकार पर क्या बोले जस्टिस भुइयां?

रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएं और अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक बन जाएं, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी है। कांग्रेस ने इसी टिप्पणी को SIR विवाद से जोड़कर CEC की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

जयराम रमेश ने कहा- नैतिक अधिकार खो दिया

जयराम रमेश ने आगे कहा, “जस्टिस भुइयां ने और भी बहुत कुछ कहा है और CEC को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। ज्ञानेश कुमार ने पद पर बने रहने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है।” यह कांग्रेस नेता का आरोप है।

SIR को लेकर पहले से विवाद

यह मामला चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।

चुनाव आयोग ने कहा- मतभेद चर्चा का हिस्सा

चुनाव आयोग ने इन कथित आपत्तियों पर कहा है कि किसी भी संस्थान में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां चर्चा व विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक उसके सभी आदेशों को कानूनी समर्थन हासिल है और उन्हें निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी किया जाता है।

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