Mahadevghat New Bridge: महादेवघाट में 43 साल बाद बनेगा नया ब्रिज, खारुन नदी पर होंगे 8 स्पॉन
Mahadevghat New Bridge: महादेवघाट में 43 साल बाद खारुन नदी पर नया ब्रिज बनेगा। 180 मीटर लंबे पुल में 8 स्पॉन होंगे। सितंबर 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है।
रायपुर। राजधानी रायपुर के महादेवघाट में खारुन नदी पर 43 साल बाद नया ब्रिज बनने जा रहा है। पुराने पुल के पास बनने वाला यह नया ब्रिज करीब 180 मीटर लंबा होगा। नदी के बीच इसमें 8 स्पॉन बनाए जाएंगे। यह ब्रिज नदी के पुराने विसर्जन घाट को अमलेश्वर से जोड़ेगा। निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है और पिलर्स के लिए खुदाई का काम चल रहा है।
नए ब्रिज के बनने से रायपुर, अमलेश्वर और पाटन-भिलाई की ओर आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अमलेश्वर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के ब्रिज डिवीजन ने यहां नया पुल बनाने की योजना तैयार की थी।
सितंबर 2027 तक पूरा करना है निर्माण
नए ब्रिज के निर्माण का ठेका अभनपुर की मेसर्स वेदांत कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक निर्माण कार्य को सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ब्रिज के निर्माण के लिए खारुन नदी में पिलर्स बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नया पुल तैयार होने के बाद मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।
बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए लिया गया फैसला
रायपुरा और अमलेश्वर को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर पिछले कुछ समय से वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। खासकर कुम्हारी नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट होने की स्थिति में रायपुर और दुर्ग के बीच आने-जाने वाले वाहनों का दबाव महादेवघाट के पुल और अमलेश्वर मार्ग पर बढ़ जाता है।
इस वजह से कई बार दोनों तरफ जाम की स्थिति बन जाती है। अमलेश्वर क्षेत्र में तेजी से हो रहे आवासीय विस्तार के कारण आने वाले समय में यहां यातायात का दबाव और बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए खारुन नदी पर नया ब्रिज बनाने की योजना को आगे बढ़ाया गया है।
1983 में बना था महादेवघाट का पुराना पुल
महादेवघाट में खारुन नदी पर मौजूदा पुल का निर्माण 1983 में हुआ था। यानी करीब 43 साल से इसी पुल के जरिए रायपुर और अमलेश्वर के बीच आवाजाही हो रही है। समय के साथ इस मार्ग पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे पुराने पुल पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ता गया।
हाल ही में बारिश के दौरान गंगरेल बांध के 14 फाटक खोले जाने के बाद खारुन नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इसके चलते महादेवघाट का पुराना पुल करीब 20 साल बाद डूब गया था। पुल पर पानी आने के कारण करीब तीन दिनों तक आवाजाही बंद रही थी।
ऐसी स्थिति में अमलेश्वर और आसपास के इलाकों के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। नया ब्रिज बनने के बाद न केवल सामान्य दिनों में ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है, बल्कि बारिश के दौरान मौजूदा पुल पर आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति में भी वैकल्पिक कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।