नई दिल्ली/रायपुर। झीरम घाटी मामले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने शनिवार को नई दिल्ली के 10 जनपथ में राहुल गांधी से मुलाकात की। करीब 45 मिनट चली बैठक में मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई और हमले से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान की गई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई।

राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के साथ झीरम हमले से प्रभावित परिवारों के सदस्य भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक में राहुल गांधी ने हमले से पहले यात्रा को दी गई सुरक्षा की विस्तृत जानकारी जुटाने को कहा। खास तौर पर यात्रा के तीन चरणों में कहां, कब और कितनी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी, इसकी रिपोर्ट तैयार करने पर चर्चा हुई।

मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए कांग्रेस सीनियर वकीलों से राय लेने की तैयारी में है। वहीं, झीरम मामले में 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामला अब हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में भी है।

राहुल गांधी ने सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी मांगी

बैठक में झीरम हमले से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई। राहुल गांधी ने यह जानकारी जुटाने को कहा कि यात्रा के अलग-अलग चरणों में सुरक्षा कहां, कब और कितनी दी गई थी।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, हमले से पहले की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और रिपोर्ट जुटाने पर जोर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।

सीनियर वकीलों से ली जाएगी कानूनी राय

झीरम मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी बैठक में विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस की ओर से सीनियर वकीलों से सलाह लेने की तैयारी बताई गई है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कानूनी सलाह के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

टीएस सिंहदेव ने जांच के साजिश वाले पहलू का मुद्दा उठाया

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी के सामने झीरम मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को रखा।

सिंहदेव ने कहा कि मामले में दोषी ठहराए गए 10 लोग मूल रूप से गांवों से जुड़े थे और कुछ लोग सामान्य काम करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में कथित साजिश के पहलू पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और कुछ लोगों को फरार बताया गया।

सिंहदेव ने NIA की जांच में साजिश के पहलू को लेकर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, रिपोर्ट के पैराग्राफ 307 में नंदकुमार पटेल और उनके बेटों की पहचान से संबंधित पूछताछ का उल्लेख है, लेकिन इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ी।

क्या है झीरम घाटी हमला

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे।

झीरम घाटी हमले की जांच के बाद NIA की विशेष अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की NIA विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था।

10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा

16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले के बाद मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया हाईकोर्ट में जारी रहेगी। दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। 

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