Godrej Project Raipur RERA Penalty: गोदरेज प्रॉपर्टीज को भारी पड़ी रेरा के आदेश की अनदेखी, 88.55 लाख की पेनल्टी की वसूली अब न्याय निर्णायक अधिकारी के जिम्मे
| Godrej Project Raipur RERA Penalty: रायपुर के डोमा स्थित गोदरेज प्रॉपर्टीज प्लॉट प्रोजेक्ट के विज्ञापन मामले में रेरा के आदेश का पालन नहीं हुआ। अब 88.55 लाख तक की शास्ति की वसूली न्याय निर्णायक अधिकारी के जिम्मे।
डोमा स्थित गोदरेज प्रॉपर्टीज के प्लॉट प्रोजेक्ट के विज्ञापन का मामला, चार प्रतिवादियों पर कार्रवाई
रायपुर। राजधानी रायपुर के डोमा स्थित ‘गोदरेज प्रॉपर्टीज रेसिडेंशियल प्लॉट्स’ परियोजना के विज्ञापन से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर अब शास्ति की वसूली की जिम्मेदारी न्याय निर्णायक अधिकारी को सौंपी गई है। प्राधिकरण ने इस मामले में अधिकतम 88.55 लाख रुपये तक की शास्ति निर्धारित की थी। हालांकि, आदेश में वास्तविक रूप से वसूली योग्य राशि का अलग से उल्लेख नहीं है।
रेरा के समक्ष मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक विज्ञापन के आधार पर पहुंचा था। इसमें डोमा स्थित गोदरेज प्रॉपर्टीज के नाम से आवासीय भूखंडों की बिक्री का प्रचार किया जा रहा था। विज्ञापन में करीब 50 एकड़ जमीन पर परियोजना होने का उल्लेख करते हुए अलग-अलग आकार के प्लॉट की कीमतें भी बताई गई थीं। इसके अनुसार, 1,000 वर्गफीट के भूखंड की कीमत 44 लाख रुपये, 1,250 वर्गफीट की 55 लाख रुपये और 1,500 वर्गफीट के भूखंड की कीमत 65 लाख रुपये बताई गई थी।
21 जनवरी के आदेश में विज्ञापन हटाने के निर्देश
इस मामले में रेरा ने 21 जनवरी 2026 को प्रारंभिक आदेश जारी किया था। प्राधिकरण ने संबंधित पक्षों को विवादित सोशल मीडिया विज्ञापन हटाने और छत्तीसगढ़ रेरा के रजिस्ट्रार के समक्ष आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक प्रतिवादी पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये की दर से शास्ति लगाने का प्रावधान किया गया था।
यह शास्ति परियोजना की अनुमानित लागत 17 करोड़ 71 लाख रुपये की पांच प्रतिशत सीमा तक निर्धारित थी। इस हिसाब से अधिकतम शास्ति 88 लाख 55 हजार रुपये तक हो सकती थी। आदेश में निर्धारित समयावधि में राशि जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे।
चार प्रतिवादियों के खिलाफ कार्रवाई
प्रकरण में रेरा ने चार प्रतिवादियों को पक्षकार बनाया था। इनमें दिक्षांत राठौर, बलराम शशिकांत झा, प्रॉपर्टी क्लाउड रियलिटी स्पेशलाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और अतुल्यम इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। रेरा के आदेश के पालन और शास्ति जमा किए जाने की स्थिति की जानकारी रजिस्ट्रार से मांगी गई थी।
रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में विज्ञापन नहीं हटाए जाने और निर्धारित शास्ति जमा नहीं किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्राधिकरण ने आगे की कार्रवाई की। इस संबंध में 2 जून 2026 को धारा 63 के तहत नया प्रकरण दर्ज किया गया। प्रतिवादियों को पंजीकृत डाक से नोटिस भेजकर जवाब देने और उपस्थित होने का अवसर दिया गया।
वसूली के लिए न्याय निर्णायक अधिकारी को भेजा मामला
प्रकरण की 4 नवंबर 2026 की आदेश-पत्रिका में प्राधिकरण ने उल्लेख किया कि पूर्व में जारी आदेश का पालन नहीं किया गया है। इसके बाद लगाई गई शास्ति की वसूली के लिए मामला न्याय निर्णायक अधिकारी को भेजने का निर्देश दिया गया। साथ ही, इस प्रकरण में प्राधिकरण के स्तर पर आगे कोई कार्यवाही शेष नहीं रहने के कारण इसे समाप्त कर अभिलेखागार में भेजने का आदेश दिया गया।
रेरा के अध्यक्ष संजय शुक्ला और सदस्य धनंजय देवांगन के इस आदेश पर रेरा की इस कार्रवाई के बाद अब शास्ति की वसूली की प्रक्रिया न्याय निर्णायक अधिकारी के स्तर पर आगे बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि 88.55 लाख रुपये की राशि अधिकतम निर्धारित सीमा है। वास्तविक रूप से कितनी शास्ति देय होगी और कितनी राशि की वसूली हो पाएगी, यह आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होगा।