Chhattisgarh High Court News: पति को 'भिखारी' कहना मानसिक क्रूरता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दी तलाक की मंजूरी, पढ़ें पूरी खबर
Chhattisgarh High Court Divorce Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जगदलपुर फैमिली कोर्ट का फैसला पलटते हुए पति को 'भिखारी' कहने और प्रताड़ित करने को मानसिक क्रूरता माना है और तलाक मंजूर किया है।
बिलासपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति को ‘भिखारी’ कहकर अपमानित करना और उसके साथ दुर्व्यवहार करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने जगदलपुर फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए पति की अपील स्वीकार कर ली और उसे तलाक की मंजूरी दे दी है।
क्या था पूरा मामला?
जगदलपुर के रहने वाले एक बिजली मैकेनिक की शादी साल 2017 में हुई थी। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उसके साथ अक्सर गाली-गलौज और मारपीट करती थी। वह उसकी कम कमाई को लेकर उसे ताने मारती थी और ‘भिखारी’ कहकर अपमानित करती थी। इसके अलावा, पत्नी उसके चरित्र पर शक करती थी और अपनी मां से अलग रहने का लगातार दबाव बनाती थी, जिससे उनके बीच तनाव बढ़ता गया।
दूसरी ओर, पत्नी ने इन तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पति और उसके परिवार वालों पर ही दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने 10 दिसंबर 2022 को खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हर झगड़ा क्रूरता नहीं, लेकिन समग्र प्रभाव जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के गवाहों और सबूतों का बारीकी से विश्लेषण किया। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि गर्भपात या आत्महत्या की धमकी जैसे गंभीर आरोपों के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उन्हें सीधे तौर पर क्रूरता का आधार नहीं बनाया जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच लगातार होने वाले झगड़े, भरोसे की कमी और परिवार के साथ असहज रिश्ते सामान्य वैवाहिक अनबन से कहीं अधिक थे। लगातार इस तरह के माहौल और ताने मिलने से पति को जो मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, वह मानसिक क्रूरता को स्पष्ट रूप से साबित करती है।
हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों का सही ढंग से आकलन नहीं किया था, जिसके चलते फैमिली कोर्ट का पुराना फैसला रद्द कर दिया और पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर कानूनी रूप से तलाक की मंजूरी दे दी।