CG Mahadev Book Case: 1.45 लाख करोड़ के कारोबार पर DGGI का शिकंजा, 40,603 करोड़ से ज्यादा GST की मांग
2020 से 2024 के बीच की जांच में करीब 2,000 पैनलों का नेटवर्क सामने आया, सौरभ चंद्राकर-रवि उप्पल समेत 66 और 31 लोगों को शो कॉज नोटिस जारी
CG Mahadev Book Case: रायपुर। चर्चित महादेव बुक ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के खिलाफ डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) ने बड़ी कार्रवाई की है। DGGI रायपुर जोनल यूनिट की जांच के बाद 26 अगस्त 2026 को दो बड़े शो कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। जांच में अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच नेटवर्क से जुड़ी करयोग्य आपूर्ति करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसी आधार पर 40,603 करोड़ रुपये से अधिक की GST मांग प्रस्तावित की गई है।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत दर्जनों को नोटिस
जांच के दायरे में महादेव बुक के कथित संस्थापक एवं प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और उनके प्रमुख सहयोगी रवि उप्पल समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं। दोनों शो कॉज नोटिस में क्रमशः 66 और 31 लोगों को नोटिसी बनाया गया है। DGGI के अनुसार, इन लोगों में कथित प्रमोटर, पैनल ऑपरेटर, सहयोगी और नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं।
करीब 2 हजार पैनलों से चलता था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि महादेव बुक कथित तौर पर किसी एक वेबसाइट या ऐप तक सीमित नहीं था, बल्कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पैनलों के जरिए बेटिंग गतिविधियां संचालित की जाती थीं। जांच में करीब 2,000 पैनलों का नेटवर्क सामने आया है। बयानों के अनुसार, एक पैनल पर प्रतिदिन औसतन 5 से 10 लाख रुपये तक जमा होने की बात सामने आई। सभी पैनलों को मिलाकर रोजाना जमा होने वाली रकम करीब 99 करोड़ रुपये तक आंकी गई है।
चार साल में 1.45 लाख करोड़ की Taxable Value
DGGI की जांच में बैंकिंग लेन-देन, पैनल नेटवर्क, दस्तावेजों और दर्ज बयानों के आधार पर 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 तक की करयोग्य आपूर्ति का मूल्य ₹14,50,10,77,48,260, यानी करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इस पर कुल ₹40,603.02 करोड़ से अधिक IGST की मांग प्रस्तावित की गई है। इसमें सितंबर 2023 तक की अवधि के लिए करीब ₹35,517.22 करोड़ और अक्टूबर 2023 से मार्च 2024 की अवधि के लिए करीब ₹5,085.80 करोड़ की मांग शामिल है।
GST रजिस्ट्रेशन और रिटर्न को लेकर भी आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग गतिविधियां संचालित होने के बावजूद नेटवर्क से जुड़े कारोबार में GST रजिस्ट्रेशन नहीं लेने और GST रिटर्न दाखिल नहीं करने के आरोप सामने आए हैं। DGGI ने इसे सरकारी राजस्व को हुए बड़े नुकसान से जोड़ते हुए कार्रवाई की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जांच में संदर्भ
DGGI की कार्रवाई में ऑनलाइन गेमिंग पर GST से जुड़े Supreme Court के Gameskraft मामले के कानूनी प्रभाव का भी संदर्भ सामने आया है। ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग से जुड़े पुराने लेन-देन तथा उनकी taxable value को GST के दायरे में लाने की कार्रवाई के लिए इस कानूनी स्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिजिटल बेटिंग नेटवर्क पर सख्ती का संकेत
महादेव बुक मामले में सामने आए आंकड़ों ने ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े GST मामलों की गंभीरता को उजागर किया है। करीब 2,000 पैनल, 1.45 लाख करोड़ रुपये की करयोग्य आपूर्ति और 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की प्रस्तावित GST मांग के साथ यह मामला DGGI की बड़ी कार्रवाइयों में शामिल हो गया है। अब जांच एजेंसी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, लेन-देन और कथित कर देनदारी से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। आगे की कार्रवाई शो कॉज नोटिस की प्रक्रिया और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।