Asian News के सेवा संकल्प कॉन्क्लेव में सीएम विष्णुदेव साय बोले- जब तक प्रभु की इच्छा, तब तक करते रहेंगे जनसेवा
कहा- केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, व्यक्तिगत आचरण में दिखे सेवा भाव
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की कड़ी में राजधानी रायपुर में एशियन न्यूज के मंच पर सेवा संकल्प कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। ‘जनसेवा का संकल्प... छत्तीसगढ़ का भविष्य’ विषय पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए जनसेवा को अपने जीवन का ध्येय बताया। उन्होंने कहा कि जनसेवा के क्षेत्र में उन्हें 35 साल हो चुके हैं और जब तक प्रभु की इच्छा रहेगी, वे जनता की सेवा करते रहेंगे।
पंच से मुख्यमंत्री तक का सफर, जनसेवा ही जीवन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के सफर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कभी गांव का सरपंच बनने के बारे में भी नहीं सोचा था। उनकी इच्छा खेती-किसानी करने की थी, लेकिन गांव के लोगों ने उन्हें पंच और फिर सरपंच बनाया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें विधानसभा का प्रत्याशी बनाया और उनका सफर आगे बढ़ता गया। पंच से लेकर सांसद और मुख्यमंत्री तक की यात्रा में उन्होंने जनसेवा को सर्वोपरि रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बचपन से ही जिम्मेदारियां आने के कारण उन्हें सामान्य बच्चों की तरह खेलने-कूदने का अवसर नहीं मिल पाया। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि जीवन में परिस्थितियां और लोगों का विश्वास व्यक्ति को नई जिम्मेदारियों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभु की इच्छा और लोगों का आशीर्वाद रहेगा, वे जनसेवा के अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ते रहेंगे।
सेवा संकल्प की शुरुआत परिवार और संस्कारों से
मुख्यमंत्री साय ने जनसेवा के संकल्प को पारिवारिक संस्कारों से जोड़ते हुए मां के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मां से बढ़कर कोई नहीं है। माता-पिता को खुश रखना जीवन का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। यदि माता-पिता अपने बच्चों के आचरण और व्यवहार से दुखी हैं, तो केवल तीर्थयात्रा या गंगा स्नान करने से भगवान प्रसन्न नहीं होंगे। एशियन गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली मशहूर कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी को CM साय ने सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि माता ने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया है, इसलिए उनका सम्मान और उनकी खुशी सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि आज भी घर से बाहर निकलने से पहले वे अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि मां खुश हैं, तो भगवान भी खुश हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जनसेवा केवल पद या राजनीतिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत परिवार के प्रति कर्तव्य, संस्कार, सम्मान और संवेदनशीलता से होती है।
रोज 1600 मकान बनाने का लक्ष्य, बस्तर में खुलेंगे सेवा डेरे
कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रोजाना 1600 मकान बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा कैंपों के माध्यम से सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में करीब 70 सेवा डेरे खोलने का विचार है। इन सेवा डेरों में विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण और दूसरे उपयोगी कार्य किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सुरक्षा कैंपों के आसपास के क्षेत्रों में लोगों तक सेवाएं और प्रशिक्षण पहुंचाने की पहल को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि सेवा का संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याण के कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए।