UPI 10 years milestone: नई दिल्ली। भारतीयों की जेब में कैश की जगह अब मोबाइल और क्यूआर कोड ने ले ली है। भारत के डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अपनी सफलता के 10 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मार्गदर्शन में 25 अगस्त 2016 को इसकी शुरुआत की थी। आज एक दशक का सफर तय करने के बाद UPI ने देश की आर्थिक तस्वीर बदलकर रख दी है और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

अब ग्लोबल हुआ 'मेड इन इंडिया' UPI

घरेलू सीमाओं को लांघकर UPI ने अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना ली है। आज यह तकनीक दुनिया के 11 देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में सक्रिय रूप से काम कर रही है। वैश्विक स्तर पर भी इसका दबदबा ऐसा है कि साल 2025 में दुनिया भर के कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों में अकेले UPI की हिस्सेदारी लगभग 49% रही। IMF ने भी इसे दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के रूप में मान्यता दी है।



आंकड़ों की जुबानी, कितनी बदली तस्वीर

UPI की रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती और हालिया आंकड़ों से लगाया जा सकता है:-

1.लेनदेन में ऐतिहासिक उछाल:- वित्त वर्ष 2016-17 में जहां सालाना मात्र 1.78 करोड़ लेनदेन होते थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गया है। यानी लेनदेन की मात्रा में करीब 13,000 गुना की भारी-भरकम बढ़ोतरी हुई है।

2.रुपये के लिहाज से ग्रोथ:- इस दौरान लेनदेन का कुल मूल्य 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 4,000 गुना से ज्यादा की छलांग है।

3.रोजाना के रिकॉर्ड:- साल 2026 में रोजाना औसतन करीब 66 करोड़ लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, अकेले जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ लेनदेन का रिकॉर्ड मासिक आंकड़ा बना, जिसका कुल मूल्य 29.88 लाख करोड़ रुपये रहा।

4.बैंकों का बढ़ता दायरा:- शुरुआत में केवल 44 बैंक UPI से जुड़े थे, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर 741 तक पहुंच चुके हैं।

छोटे भुगतानों में भी छाई यूपीआई

UPI अब सिर्फ बड़े लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों की पहली पसंद बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल लेनदेन में व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) की हिस्सेदारी 63% है। दिलचस्प बात यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में हुए कुल P2M भुगतानों में से 86% भुगतान 500 रुपये से भी कम के थे।

अगले दशक की तैयारी

सरकार और एनपीसीआई की योजना अगले 10 वर्षों में UPI को और अधिक धार देने की है। आने वाले समय में नए उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों को इस नेटवर्क से जोड़ने, तकनीकी नवाचार (Technology Innovation) को बढ़ावा देने और देश के कोने-कोने तक वित्तीय सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।

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