छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र में आज ‘हमर क्लिनिक’ योजना को लेकर बड़ी बहस देखने को मिली। पूर्व मंत्री राजेश मुणत ने अधूरे पड़े ‘हमर क्लिनिक‘ और रुके हुए कार्यों का मामला जोर-शोर से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर ‘हमर क्लिनिक’ की स्थिति क्यों अधूरी है और सरकार की इस योजना में वास्तविक भूमिका क्या है।
मंत्री श्याम बिहारी का जवाब:
मंत्री श्याम बिहारी ने स्पष्ट किया कि ‘हमर अस्पताल, हमर क्लिनिक’ योजना राज्य में स्वास्थ्य विस्तार के उद्देश्य से चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग ने योजना के लिए 38 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की थी, लेकिन वित्त विभाग द्वारा देरी के कारण यह राशि जारी नहीं हो सकी। इस देरी पर जुर्माना भी लगाया गया।
मंत्री ने कहा, “जब तक जुर्माना नहीं चुकाया जाता, अगली किस्त जारी नहीं होगी। हालांकि, इस बार के बजट में राशि का प्रावधान किया गया है, और दूसरी और तीसरी किस्त भी जल्द जारी की जाएगी।”
राजेश मुणत का सवाल:
राजेश मुणत ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘हमर क्लिनिक’ के लिए अब तक कितने ड्रॉ तैयार हुए हैं और कितने मानव संसाधन उपलब्ध हैं।
मंत्री का स्पष्टीकरण:
मंत्री ने जवाब दिया, “हर हमर क्लिनिक में पांच मानव संसाधन की व्यवस्था होती है। जहां भी पूरा सेटअप तैयार है, वहां क्लिनिक सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।”
‘हमर क्लिनिक’ योजना को लेकर यह चर्चा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और सरकार की प्रतिबद्धता पर केंद्रित रही। यह योजना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन वित्तीय विलंब और प्रशासनिक मुद्दों के चलते इसकी प्रगति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि बजट में किए गए प्रावधान से यह योजना कितनी गति पकड़ती है।
