Maharashtra Model in Bengal: कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 में से 60 से अधिक बागी विधायक विधानसभा पहुंचकर स्पीकर से मिलने की तैयारी में जुट गए।
Maharashtra Model in Bengal: राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को ‘महाराष्ट्र मॉडल’ के तौर पर देखा जा रहा है, जहां कभी एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। अब बंगाल में भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती मिलने और पार्टी में बड़े विभाजन की अटकलें तेज हो गई हैं।
Maharashtra Model in Bengal: जानकारी के अनुसार, बागी विधायकों का नेतृत्व पार्टी से निष्कासित नेताओं संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये विधायक स्पीकर के समक्ष खुद को तृणमूल कांग्रेस का असली गुट घोषित करने का दावा पेश कर सकते हैं।
Maharashtra Model in Bengal: TMC में दो फाड़ की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट सकती है। एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व वाला गुट होगा, जबकि दूसरी ओर संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में नया शक्ति केंद्र उभर सकता है।
Maharashtra Model in Bengal: महाराष्ट्र मॉडल की चर्चा तेज
बंगाल के सियासी घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र की उस राजनीतिक उठापटक से की जा रही है, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन हासिल किया था। बाद में शिंदे गुट ने पार्टी और चुनाव चिह्न पर भी दावा किया था। बंगाल में भी इसी तरह की स्थिति बनने की चर्चा जोरों पर है।
Maharashtra Model in Bengal: ममता के खिलाफ नहीं, पार्टी बचाने की लड़ाई: रिजू दत्ता

टीएमसी के बागी नेता और पार्टी प्रवक्ता रिजू दत्ता ने कहा कि उनका कदम ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “हम पार्टी को बचाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। कोई भी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। वहीं बागी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने दावा किया कि उनके साथ 59 विधायकों का समर्थन है और वही तृणमूल कांग्रेस के वास्तविक प्रतिनिधि हैं।
Maharashtra Model in Bengal: स्पीकर के सामने रखी जा सकती हैं तीन बड़ी मांगें
सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर से मुलाकात के दौरान बागी विधायक तीन प्रमुख मांगें रख सकते हैं। पहली, उन्हें ही तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक गुट माना जाए। दूसरी, दो-तिहाई बहुमत होने के आधार पर पार्टी के चुनाव चिह्न पर उनका अधिकार स्वीकार किया जाए। तीसरी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दी जाए।
Maharashtra Model in Bengal: यदि बागी विधायकों के दावे सही साबित होते हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट साबित हो सकता है और राज्य की सियासत में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
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