West Bengal Assembly Elections: बंगाल में ‘एकला चलो’ की राह पर TMC, ममता दीदी का ऐलान- विधानसभा चुनाव में बिना गठबंधन उतरेगी पार्टी, कांग्रेस को झटका
West Bengal Assembly Elections: नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी राज्य की सभी सीटों पर बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ेगी।
West Bengal Assembly Elections: ममता बनर्जी के इस फैसले को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाल के महीनों में यह अटकलें तेज़ थीं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर रखने के लिए बंगाल में INDIA गठबंधन के दल साझा रणनीति अपना सकते हैं, लेकिन ममता के ऐलान ने इन कयासों पर विराम लगा दिया है।
West Bengal Assembly Elections: ममता बनर्जी के फैसले पर बीजेपी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दीदी हार के डर से घबरा गई हैं और उन्हें अपने सहयोगियों पर भी भरोसा नहीं रहा। वहीं कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने इस निर्णय को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए कहा कि इससे अंततः बीजेपी को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। वाम दलों ने भी संकेत दिए हैं कि यह फैसला विपक्षी मतों के बंटवारे का कारण बन सकता है।
West Bengal Assembly Elections: फैसले के पीछे क्या हैं कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी के इस निर्णय के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ममता खुद को बंगाल की बेटी और राज्य के हितों की एकमात्र मजबूत आवाज़ के रूप में स्थापित करना चाहती हैं। किसी राष्ट्रीय दल के साथ गठबंधन से उनकी क्षेत्रीय राजनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है।
West Bengal Assembly Elections: इसके अलावा, गठबंधन की स्थिति में टीएमसी को कांग्रेस और वाम दलों के लिए सीटें छोड़नी पड़तीं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष पैदा होने का खतरा था। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में मुस्लिम और ग्रामीण मतदाताओं का ध्रुवीकरण टीएमसी के पक्ष में अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है।
West Bengal Assembly Elections: 2026 में विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं। राज्य विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं, जिनमें बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है। तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है और पार्टी नेतृत्व ने 215 से अधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। वहीं बीजेपी राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में खुद को मज़बूत करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी भ्रष्टाचार, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर ममता सरकार को घेरते हुए सत्ता परिवर्तन और ‘सोनार बांग्ला’ के सपने का दावा कर रही है।
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