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CG News: रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल और अस्थाई संरचनाओं के निर्माण को लेकर नई नीति लागू की गई है। हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शासन ने मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ को बताया कि 25 अगस्त 2025 को नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 और नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत नई नीति जारी की गई है। इसके अनुसार, बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति, संस्था, समिति या संगठन सार्वजनिक मार्ग, फुटपाथ, चौराहे या खुले स्थानों पर पंडाल, अस्थाई संरचना, धरना, जुलूस, सभा या रैली आयोजित नहीं कर सकेगा।
CG News: याचिकाकर्ता की दलील और नीति का विवरण
रायपुर निवासी याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने कोर्ट में बताया कि बिना अनुमति के इस तरह के आयोजन करने पर सजा का प्रावधान है। शासन ने दो प्रकार के दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
छोटे पंडाल (500 लोगों तक, 5000 वर्ग फीट से कम):
-नगर पालिका निगम और स्थानीय निकाय से अनुमति लेनी होगी।
-मुख्य मार्गों पर अनुमति नहीं दी जाएगी; यदि दी जाती है, तो वैकल्पिक मार्ग चिन्हित करना होगा।
-बिजली तारों के नीचे पंडाल निर्माण प्रतिबंधित।
-पंडाल अग्निरोधी सामग्री से बनाए जाएंगे।
-आयोजकों को साफ-सफाई की व्यवस्था करनी होगी।
बड़े पंडाल (500 से अधिक लोग, 5000 वर्ग फीट से अधिक):
-अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, थाना प्रभारी, अग्निशमन और बिजली विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य।
-अनुमति के साथ शुल्क जमा करना होगा।
-जनरेटर बैकअप की व्यवस्था आवश्यक।
-किसी अन्य भवन से 15 फीट की दूरी रखनी होगी।
गणेश विसर्जन में नीति की होगी परीक्षा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि आगामी गणेश विसर्जन के दौरान इस नई नीति की प्रभावशीलता की जांच हो सकेगी। शासन ने दुर्गा पूजा के बाद अगली सुनवाई का आग्रह किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की है।
यह नीति सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है, जिससे सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था और जोखिम को कम किया जा सके।
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