कांग्रेस की बैठक में पीछे की ठक - ठक : जोश और आक्रोश में नेता तो होश में कार्यकर्ता
बिलासपुर। कांग्रेस की बैठक में पीछे की ठक – ठक : जिले की कांग्रेस पार्टी पहले भी विवादों में रही है। इसके बावजूद भी नगरीय निकाय चुनाव के शंखनाद होते ही कांग्रेस अपने दावेदारों की समीक्षा करने में जुट गई है। बिलासपुर में कांग्रेस पार्टी के पर्यवेक्षक जांजगीर के पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन को बनाया गया है। उन्हें मंगलवार को कांग्रेस भवन में आकर दावेदारों से बातचीत कर चुनाव के संदर्भ में बातचीत करना था। दोपहर 12 बजे से कार्यकर्ता और उम्मीदवारों को कांगड़ा भवन में बुलाया गया था । लिहाज़ा सभी अपना- अपना काम और क्षेत्र छोड़कर कांग्रेस भवन की परिक्रमा में एक दूसरे का हाथ जोड़ते दिखाई दिए। तो वहीं नेताजी मोतीलाल देवांगन के इंतज़ार में दोपहर के 3 बजने को आ गए और जब उनका कोई अता -पता नहीं चला, तो जोश में आकर बिलासपुर संगठन प्रभारी सुबोध हरितवाल ने बैठक को शुरू कर दिया । बैठक में नगरीय निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ शामिल थे । अब यहीं से शुरू हुई कांग्रेस की बैठक में पीछे की ठक -ठक।
कांग्रेस की बैठक में पीछे की ठक – ठक :
इस बैठक में अव्यस्वथा और कार्यकर्ताओं की बातचीत से अशांति होते देख नाराजगी जाहिर करते हुए सुबोध हरितवाल ने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए लम्बा भाषण झाड़ दिया । उन्होंने कहा कि बैठक में वक्ताओं की बातों को गंभीरता से सुने। इनकी अगुवाई में ही नगर निगम महापौर और पार्षद का चुनाव लड़ना है। एक दूसरे के आपस में बातचीत से अशांति व्यवस्था फ़ैल रही है। सुबोध हरितवाल की नाराज़गी भी जायज लग रही थी। एक तरफ़ प्रभारी मोतीलाल देवांगन का समय पर नहीं पहुँचना और उनके आने की ख़बर को लेकर कार्यकर्ताओं का उनसे पल-पल पूछना थोड़ा परेशान तो किया होगा।
पीछे कार्यकर्ताओं में चलती रही गुटर-गूं
अपनी नाराजगी को सुबोध नहीं रोक पाये और कार्यकर्ताओं को अनुशासन की शिक्षा देने खड़े हो गए। वहीं पीछे की गुटूर-गूं में कार्यकर्ता आपस में आज हो रही भाषण से ख़फ़ा थे कि आज भाषण सुनने थोड़ी आए है। अब चुनाव का समय 20 दिन से भी कम बचा हुआ है। ऐसे में समय का काफ़ी आभाव है और नेता के प्रतीक्षा में नेताओं का मनोपली भाषण चल रहा है। लिहाज़ा पीछे बैठे कार्यकर्ता अपने मन की भड़ास को पीछे बैठकर एक दूसरे से बातचीत करते हुए निकाल रहे थे। इस बैठक में अब हर किसी के ज़ेहन में केवल एक ही सवाल गूंज रहा था कि बैठक अब होगी भी या नहीं ? इसका जवाब किसी भी नेता के पास नहीं था। अब नेताजी के आने बाद होगा , तब होगा। कार्यकर्ताओं में ऐसी चर्चा चलती रही।ऐसा नहीं है कि सुबोध हरितवाल कांग्रेस का हाल नहीं जानते, मगर कार्यकर्ताओं को उपदेश देना भी शायद उनकी मजबूरी हो ?
