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छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती आज...

Uma Verma
छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती आज...
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छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती आज…

मुंबई/जुन्नार: छत्रपति शिवाजी महाराज : महाराष्ट्र के कण-कण में आज वीरता और स्वाभिमान की लहर दौड़ रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती पर पूरे राज्य में भव्य उत्सव मनाया जा रहा है। केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिवाजी के शौर्य और प्रशासनिक कुशलता को याद किया जा रहा है।

छत्रपति शिवाजी महाराज :इस बार के उत्सव को और भव्य बनाने के लिए मुंबई, पुणे, और कोल्हापुर सहित कई शहरों में शिवकाल की जीवंत झांकियां निकाली जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार प्राचीन मराठा सैन्य परंपराओं को दर्शाने वाली झांकियां बनाई गई हैं, जिनमें तलवारबाजी, घुड़सवारी और युद्धकला की प्रस्तुतियां शामिल हैं।

गूंजेगा "हर हर महादेव"

शिवाजी महाराज का जीवन किलों से जुड़ा रहा है, इसलिए इस बार सिंहगढ़, रायगढ़, और प्रतापगढ़ किलों पर विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहां शिवाजी महाराज के प्रसिद्ध युद्धों का नाट्य रूपांतरण किया जा रहा है, जिससे लोगों को उनके सैन्य कौशल और रणनीतियों की गहरी समझ मिलेगी।

युवा पीढ़ी को जोड़ने की पहल

इस साल शिव जयंती को डिजिटल माध्यम से भी भव्य रूप दिया जा रहा है। "डिजिटल शिवाजी" अभियान के तहत महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में वीआर (Virtual Reality) और एआई (Artificial Intelligence) आधारित प्रदर्शनी लगाई है, जिससे युवा पीढ़ी को शिवाजी के शौर्य, युद्धनीति और कुशल प्रशासन के बारे में आधुनिक तकनीकों के जरिये जानकारी मिलेगी।

शिवाजी महाराज की जन्मस्थली शिवनेरी किला इस वर्ष के आयोजन का केंद्र बना हुआ है। आधी रात को विशाल आतिशबाजी और शास्त्रीय संगीत के साथ मंत्रोच्चार से शिवनेरी का वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मशाल जुलूस निकालकर शिवाजी महाराज के बलिदान और आदर्शों को नमन किया।

राजनीतिक और सांस्कृतिक भागीदारी

इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य गणमान्य नेता भी शामिल होंगे। इसके अलावा, महाराष्ट्र की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी इस वर्ष के आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में सहयोग दिया है।

एक विचारधारा

छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा राजा नहीं थे, बल्कि वे एक विचारधारा, एक प्रेरणा और एक अटूट संकल्प का प्रतीक हैं। उनकी जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों को अपनाने और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प भी है। आज पूरे महाराष्ट्र में बस एक ही नारा गूंज रहा है—


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